13 साल कोमा में, फैसले के 13 दिन बाद दुनिया से विदा

नवभारतटाइम्स.कॉम

गाज़ियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली एम्स में निधन हो गया। वे 13 साल से कोमा में थे। 13 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। 2013 में एक हादसे के बाद वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में चले गए थे। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी वे ठीक नहीं हुए।

harish rana who was in a coma for 13 years passes away 13 days after being granted euthanasia

n गाज़ियाबाद : पिछले 13 साल से कोमा में रहे गाजियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली के एम्स में मंगलवार को निधन हो गया। 13 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। हरीश के जीवन से 13 का एक अलग तरह से कनेक्शन था। उनका परिवार राजनगर एक्सटेंशन स्थित सोसायटी में 13वीं मंजिल पर ही रहता है। जैसे ही उनके निधन की खबर यहां पहुंची चारों ओर मातम पसर गया। लोगों की आंखों में वह दृश्य आ गया जब ब्रह्मकुमारी आश्रम की रूपा ने एम्स विदा करने से पहले हरीश के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, सबको माफ करते हुए, सबको माफी देते हुए जाओ। बुधवार को पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क साउथ दिल्ली में किया जाएगा। 2013 में हरीश राणा 20 साल के थे : चंडीगढ़ में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इस हादसे में उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हो गई। इस कारण वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (पीवीएस) में चले गए। उसके बाद से वे 13 वर्ष तक कोमा में रहे। लाखों रुपये इलाज पर खर्च करने के बाद भी वह ठीक न हो सके। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी। इस पर 13 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने सम्मानजनक तरीके से मृत्यु की इजाजत दी। मंगलवार को हरीश की विदाई का दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। यह पल न सिर्फ दर्दभरा था, बल्कि इंसानी संवेदनाओं की गहराई को भी बयां कर गया। यहां रहने वाली सोशल वर्कर तेजस चतुर्वेदी ने बताया कि हरीश की मुक्ति की सूचना मिली जरूर, लेकिन यकीन नहीं हुआ।

उनके घर पर मौजूद रिश्तेदारों को भी इसका इल्म तक नहीं था। हरीश जब यहां से अस्पताल गए थे तो मेरा एक मन उनकी मुक्ति की कामना कर रहा था। उनके पिता अशोक राणा, मां निर्मला राणा और भाई आशीष राणा की पीड़ा हरीश का लंबा संघर्ष सब कुछ आंखों के सामने घूमने लगा। अब सोसायटी में खामोशी है।