n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
तेजी से विकसित हो रहा गुड़गांव जहरीली हवा की भी गिरफ्त में जा रहा है। दुनियाभर में वायु गुणवत्ता निगरानी करने वाली स्विस कंपनी IQAir की मंगलवार को जारी 2025 वर्ल्ड एयर क्वॉलिटी रिपोर्ट ने मिलेनियम सिटी की हवा को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 23वें स्थान पर पहुंच गया है जबकि देश के भीतर यह 11वें स्थान पर है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शहर में PM2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय सुरक्षित मानक 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से 74.6 फीसदी अधिक दर्ज किया गया है। यह संकेत है कि गुड़गांव की हवा अब सीधे तौर पर लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है।
143 देशों के 9,446 शहरों का विश्लेषण: रिपोर्ट में 143 देशों के 9446 शहरों के करीब 40 हजार एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि दुनिया के 91 फीसदी शहर WHO के एयर क्वॉलिटी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। भारत के 12 शहर सबसे प्रदूषित सूची में शामिल हैं, जिनमें गुड़गांव भी है।
आखिर क्यों बिगड़ रही गुड़गांव की हवा : सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एनालिस्ट मनोज कुमार के मुताबिक, गुड़गांव में बढ़ता प्रदूषण कई स्थानीय और बाहरी कारणों का नतीजा है जो मिलकर हवा को जहरीला बना रहे हैं। शहर में तेजी से हो रहा कंस्ट्रक्शन धूल और मलबे को हवा में घोल रहा है, जिससे PM2.5 का स्तर बढ़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों की बढ़ती संख्या, खासकर डीजल और पेट्रोल से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का बड़ा स्रोत बन चुका है। औद्योगिक इकाइयों से होने वाला उत्सर्जन और आसपास के इंडस्ट्रियल एरिया का असर भी हवा की गुणवत्ता को खराब कर रहा है। कूड़ा जलाने की घटनाएं हवा में जहरीले कणों की मात्रा को और बढ़ा देती हैं। मौसम की भूमिका भी अहम है। जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
नहीं संभले तो और बिगड़ेंगे हालात: गुड़गांव का टॉप-25 प्रदूषित शहरों में शामिल होना एक स्पष्ट चेतावनी है। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद विजय आर्या का कहना है कि यदि प्रदूषण के स्रोतों पर सख्त नियंत्रण, ग्रीन कवर बढ़ाने और मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत करने जैसे कदम तुरंत नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह शहर गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकता है।

