ठगों से मिले 504 सिम कार्ड के 'कनेक्शन' खंगाल रही पुलिस

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव पुलिस एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश कर रही है। गिरोह से 504 सिम कार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस इन सिम कार्ड के कनेक्शन की जांच कर रही है। यह गिरोह फिलीपींस से नेपाल और बिहार के रास्ते भारत में सक्रिय था। आरोपी राहुल कुमार से पूछताछ में कई अहम जानकारी मिली है।

police investigating connections of 504 sim cards cyber gang exposed mastermind linked to philippines

n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव

डीएलएफ फेज-3 के यू-ब्लॉक में अवैध सिम बॉक्स (GSM गेटवे) के जरिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के खुलासे के बाद गुड़गांव पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में जुट गई है। गिरफ्तार आरोपी राहुल कुमार से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं, जिसके आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस अब बरामद हुए कई कंपनियों के 504 सिम कार्ड्स के 'कनेक्शन' खंगाल रही है, जिसके लिए कंपनियों से डेटा मांगा गया है।

पुलिस के सामने बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि इन कंपनियों के 504 सिम कार्ड एक साथ इतनी बड़ी संख्या में इस गिरोह तक कैसे पहुंचे। पुलिस उन वितरकों और रिटेलर्स की पहचान कर रही है जिन्होंने ये सिम जारी किए। शुरुआती जांच में अंदेशा है कि ये सिम कार्ड फर्जी डॉक्युमेंट या निर्दोष लोगों के आधार कार्ड कादुरुपयोग करके एक्टिवेट कराए गए थे। पुलिस ने संबंधित टेलीकॉम कंपनियों से इन सिम कार्ड्स की एक्टिवेशन हिस्ट्री और केवाईसी विवरण मांगा है।

फिलीपींस से नेपाल और फिर बिहार: आरोपी राहुल ने पूछताछ में खुलासा किया कि अवैध उपकरण सिम बॉक्स और राउटर फिलीपींस से चलकर नेपाल पहुंचते थे। वहां से इन्हें बिहार रूट के जरिए भारत में प्रवेश कराया जाता था। पुलिस अब उस 'कूरियर नेटवर्क' और स्थानीय संपर्कों की तलाश कर रही है जो बिहार से गुड़गांव और नोएडा तक इन उपकरणों की डिलीवरी सुनिश्चित करते थे। बताया जा रहा है कि आरोपी राहुल केवल एक मोहरा था जिसे सेटअप और डिलीवरी के लिए 15 हजार रुपये मिले थे। असली मास्टरमाइंड फिलीपींस में बैठा है, जो वीडियो कॉल के जरिए सिम बॉक्स ऑपरेट करवा रहा था।

जल्द होंगी कई और गिरफ्तारियां: एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान ने बताया कि मामले में कुछ अन्य संदिग्धों की पहचान की गई है। जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें जुट गई है। बरामद किए गए सिम के बारे में भी जानकारी ली जा रही है। जल्द ही और खुलासा हो सकता है। सभी लोगों और मकान मालिकों से अपील की जा रही है कि वे अपने किरायेदारों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध उपकरण या टेलीकॉम सेटअप की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

ऐसे काम करता था नेटवर्क: पुलिस जांच में सामने आया था कि सिम बॉक्स में एक साथ दर्जनों सिम लगाकर कॉल ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता था और इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल की तरह दिखाया जाता, इससे साइबर ठग अपनी पहचान छुपाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे।