िमलेनियम सिटी में वेप और फ्लेवर्ड हुक्के का बढ़ रहा 'खतरनाक ट्रेंड'

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव के मिलेनियम सिटी में वेप और फ्लेवर्ड हुक्के का चलन बढ़ रहा है। युवा सिगरेट की जगह इन्हें अपना रहे हैं। डॉक्टर इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बता रहे हैं। यह लत मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रही है। स्टाइल और स्ट्रेस रिलीफ के लिए शुरू की गई यह आदत निर्भरता में बदल रही है।

millennium citys dangerous trend of vapes and flavored hookahs rising nicotine addiction among youth

n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

मिलेनियम सिटी में निकोटीन सेवन का नया और चिंताजनक ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। सिगरेट की जगह अब वेप, डिस्पोजेबल ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और फ्लेवर्ड हुक्के की मांग बढ़ी है।

सोशल मीडिया और कैफे कल्चर के प्रभाव से युवा तेजी से वेप और ई-सिगरेट की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टर्स के अनुसार भले ही वेप और फ्लेवर्ड ई-सिगरेट कम हानिकारक लगें, लेकिन स्वास्थ्य पर इनका काफी बुरा असर पड़ता है। मैक्स हॉस्पिटल गुड़गांव के पल्मोनोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर व यूनिट हेड डॉ. शिवांशु राज गोयल का कहना है कि लोग यह मानते हैं कि वेप सिगरेट से सुरक्षित है, जबकि यह गलत है। वेप में मौजूद निकोटीन फेफड़ों, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है।

बताते हैं कि उनकी ओपीडी में आने वाले श्वसन रोगियों में युवा वर्ग की संख्या बढ़ी है।

स्ट्रेस रिलीफ के नाम पर शुरू हो रही लत : सेक्टर-31 पॉलीक्लिनिक के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सचिन खटाना का कहना है कि वेपिंग और हुक्का का बढ़ता चलन केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है। इस उम्र में निकोटीन का सेवन मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करता है और नशे की लत तेजी से विकसित हो सकती है। कई बच्चे और युवा इसे स्टाइल स्टेटमेंट, स्ट्रेस रिलीफ या सोशल एक्सेप्टेंस के लिए शुरू करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत निर्भरता में बदल जाती है।