डिमांड का पहले पता चलेगा, बिजली कटौती रोकने में मिलेगी मदद, AI से बदलेगा सिस्टम

नवभारतटाइम्स.कॉम•
ai will predict electricity demand in advance helping to prevent outages
Vishal.sharma3 @timesofindia.com

nनई दिल्लीः देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार 2026-27 में 70 गीगावॉट से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की तैयारी में है। ऐसा हुआ तो यह एक साल में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही बिजली सेक्टर में AI का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी फोकस है। इससे न सिर्फ बिजली की मांग का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा, बल्कि ग्रिड में खराबी, बिजली कटौती और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं का भी समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय पावर मिनिस्टर मनोहर लाल ने बुधवार को नई दिल्ली में सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी(CEA) के 53वें स्थापना दिवस पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअली जानकारी दी।

मनोहर लाल ने कहा कि AI की मदद से बिजली की मांग का सटीक अनुमान लगाने, सौर और पवन ऊर्जा को ग्रिड से बेहतर तरीके से जोड़ने और बिजली संयंत्रों के रखरखाव की पहले से योजना बनाने में मदद मिल सकती है। इससे बिजली सप्लाई को अधिक भरोसेमंद और किफायती बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर को ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा, जिसमें समस्या आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही उसके संकेत मिल जाएं। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने वर्चुअली जुड़कर कहा कि देश में कुल बिजली में से आधी से ज्यादा (लगभग 55 प्रतिशत) बिजली पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले स्रोतों जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा (308 गीगावॉट) से मिल रही है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि भारत को सेक्टर की समस्याओं के समाधान के लिए अपने AI टूल भी विकसित करने चाहिए। CEA चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने कहा कि परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता के लक्ष्य पूरा करने के लिए 15 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत होगी।