लोखंडे न होते, तो संडे भी काम करना पड़ता

नवभारतटाइम्स.कॉम•
asian games 2023 historic performance by indian archery team key role of sports ministry under pm modis leadership
आईची-नागोया में हुए एशियाई खेलों में भारतीय तीरंदाजी टीम नौ पदकों (5 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य) के साथ स्वदेश लौटी है। इनमें से हर एक पदक के पीछे साहस, समर्पण और बलिदान की गाथा छिपी है, जो दर्शाती है कि हमारा खेल तंत्र पूरी तरह परिपक्व हो चुका है।

सदियों से पक्षी की आंख पर नजर टिकाए अर्जुन की छवि भारत के लिए एकाग्रता की शाश्वत सीख रही है। आईची-नागोया में यह सीख साकार हो उठी। हमारे तीरंदाजों को लक्ष्य के सिवा कुछ नहीं दिखा, न प्रतिद्वंद्वियों की ख्याति, न इतिहास का बोझ और न देश की उम्मीदों का दबाव। उन्हें केवल 'दस' का निशान दिखा और उन्होंने उसे बार-बार भेदा।
भारत के साहसी एथलीट

हमारे कंपाउंड तीरंदाजों ने लगातार दूसरे एशियाई खेलों में पुरुष, महिला और मिक्स्ड- तीनों स्पर्धा में खिताब जीते। महिला टीम ने फाइनल में विश्व रेकॉर्ड की बराबरी की, वहीं मिक्स्ड जोड़ी ने लॉस एंजिल्स ओलिंपिक्स का कोटा हासिल किया। हालांकि इन खेलों की सबसे ऐतिहासिक कहानी रिकर्व वर्ग में लिखी गई, जहां लंबे समय से दक्षिण कोरिया का वर्चस्व रहा है। हमारी महिला रिकर्व टीम ने लगातार सात एशियाई खेलों से चले आ रहे कोरियाई दबदबे को समाप्त कर भारत को पहला स्वर्ण दिलाया। मिक्स्ड रिकर्व जोड़ी ने इस स्पर्धा में पहला पदक जीता और पुरुष रिकर्व टीम ने लगातार दूसरा रजत पदक हासिल किया।

इसके बाद, अंतिम दिन 17 वर्षीय युवा महिला तीरंदाज ने व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में धैर्य दिखाते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता और ओलिंपिक्स में जगह पक्की की। दबाव के क्षणों में उनका यह निडर संयम बताता है कि भारत के एथलीट कितने साहसी हैं। यह बात भी बेहद सुखद है कि हमारी महिला तीरंदाजों ने मोर्चे से नेतृत्व किया। रिकर्व से लेकर कंपाउंड तक, जब भी जरूरत पड़ी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और देश की अनगिनत युवा बच्चियों को धनुष थामने की प्रेरणा दी है।

पीएम का साथ महत्वपूर्ण

यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि लगभग 15 वर्षों के निरंतर और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। कई बार ऐसा भी हुआ जब पोडियम करीब दिखकर भी दूर रह जाता था, लेकिन हमारे कोच, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों का विश्वास कभी नहीं डगमगाया। नागोया में हमारे खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों, लंबे सफर, तेज हवाओं और भारी बारिश का भी डटकर सामना किया।

यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के बिना अधूरा रहता। उनके मार्गदर्शन में खेल राष्ट्र की प्राथमिकताओं में किनारे से निकलकर बिल्कुल केंद्र में आ गए हैं। 'खेलो इंडिया' ने देश के दूरदराज के कोनों से प्रतिभाओं को तराशा है, जबकि 'टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) ने हमारे शीर्ष एथलीटों को वह सहयोग और सम्मान दिया है, जिसके वे हकदार हैं। सबसे बढ़कर, पीएम मोदी ने खिलाड़ियों के प्रति देश के दृष्टिकोण को बदल दिया। वह जीत और हार, दोनों में खिलाड़ियों के साथ खड़े रहते हैं और हर खिलाड़ी को विश्वास दिलाते हैं कि 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदें उनके साथ हैं।

खेल प्रशासन से लंबे समय से जुड़े रहने के कारण मैंने कई अभियान देखे हैं, लेकिन नागोया का अनुभव मेरे लिए भी अनूठा था। जब मैं टीम के साथ था, तो केंद्रीय खेल मंत्री ने दो बार फोन कर खिलाड़ियों की तैयारियों और कुशलक्षेम की जानकारी ली। पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने यही कार्य संस्कृति बनाई है, जहां देश के सर्वोच्च पद न केवल पदक मंच पर, बल्कि यात्रा के हर कदम पर हमारे खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।

विश्वास से बनते हैं विजेता

जब कोई देश अपने एथलीटों का सम्मान करता है, तो वह उन पर विश्वास करने लगता है और जहां विश्वास होता है वहीं विजेता बनते हैं। आईची-नागोया के ये पदक उन निडर युवा भारतीयों ने जीते हैं, जिन्होंने झुकने से इनकार कर दिया और यही पदक इस नए 'स्पोर्टिंग इंडिया' का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। हमारे तीरंदाजों से मैं यही कहूंगा कि आपने 140 करोड़ देशवासियों के दिलों को गर्व से भर दिया है। ये पदक हमारे कोच, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों के भी हैं, जिनके त्याग अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे प्रधानमंत्री के अनुकरणीय नेतृत्व में भारत हर खेल स्पर्धा में नई ऊंचाइयां छुएगा। जहां तक हमारे तीरंदाजों का सवाल है, उन्होंने एशिया को अपनी क्षमता दिखा दी है। वे अब ओलिंपिक के लिए तैयार हैं और जल्द ही पूरा विश्व उनकी इस क्षमता का लोहा मानेगा।

(भारतीय तीरंदाजी संघ के महासचिव और वर्ल्ड आर्चरी एशिया के कार्यकारी बोर्ड सदस्य)