Hiding Cigarette alcohol Habits Can Be Fatal Avoid Giving Incomplete Information To Doctors
सिगरेट-शराब की आदत डॉक्टरों से छिपाना जान लेवा बन सकता है
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT न्यूज, लखनऊ
ऑपरेशन टलने के डर से कुछ मरीज डॉक्टरों से अपनी बुरी आदतें और बीमारी के लक्षण छिपा लेते हैं। कोई सिगरेट पीने की बात नहीं बताता तो कोई शराब की मात्रा कम करके बताता है। बच्चों के मामले में भी अभिभावक मामूली सर्दी-जुकाम और खर्राटों की जानकारी देने से बचते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं ऑपरेशन की तारीख आगे न बढ़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक, अधूरी जानकारी एनेस्थिसिया के दौरान और ऑपरेशन के बाद मरीज की जान जोखिम में डाल सकती है। यह जानकारी केजीएमयू के एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. तन्मय तिवारी ने दी। केजीएमयू में शुक्रवार को विश्व एनेस्थिसिया दिवस पर इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की ओर से कार्यक्रम में बोल रहे थे।10 से 15 फीसदी मरीज छिपाते हैं आदतें : डॉ. तन्मय तिवारी ने बताया कि करीब 10 से 15 फीसदी मरीज ऑपरेशन से पहले धूम्रपान, शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की जानकारी छिपा सकते हैं। कुछ मरीज कहते हैं कि वे कभी-कभार ही सिगरेट पीते हैं या बहुत कम शराब लेते हैं। कई लोग हाल में सेवन करने की बात भी नहीं बताते। जबकि डॉक्टरों के लिए यह जानना जरूरी है कि मरीज कितनी सिगरेट पीता है, कितनी शराब लेता है और आखिरी बार कब सेवन किया था।
धूम्रपान से बढ़ सकता है सांस की परेशानी का खतरा : डॉ. तिवारी के मुताबिक, धूम्रपान से ऑपरेशन के बाद सांस संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इससे घाव भरने में देरी हो सकती है और मरीज को अस्पताल में अधिक समय तक रुकना पड़ सकता है। ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी के मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टरों से आदतें छिपाने के बजाय सही जानकारी देना जरूरी है।
बच्चों के खर्राटों को भी न करें नजरअंदाज : केजीएमयू एनेस्थिसिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका कोहली ने बताया कि तीन साल से कम उम्र के बच्चों में सर्दी, नाक बहना या खर्राटे जैसी परेशानियां भी एनेस्थिसिया के दौरान जोखिम बढ़ा सकती हैं। अभिभावकों को ऑपरेशन टलने के डर से ये लक्षण नहीं छिपाने चाहिए।