Agencies Should Be Prepared For New Threats Of Crime Justice Singh
अपराध के नए खतरों के लिए तैयार हों एजेंसियां: जस्टिस सिंह
Contributed by: ankur.tiwari|नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, अपराधी भी उतनी ही तेजी से अपराध के नए तरीके खोज रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों और फरेंसिक विशेषज्ञों को हमेशा अपराधियों से एक कदम आगे रहना होगा। यह बात इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस राजीव सिंह ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ फरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘टेक-संगम’ के समापन सत्र में कही।
रविवार को सेमिनार में न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने साइबर अपराध , डेटा संरक्षण , वैज्ञानिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उभरती तकनीकों की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। जस्टिस राजीव सिंह ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून लागू होने के बावजूद इसकी व्यावहारिक और सटीक कानूनी व्याख्या की कमी महसूस की जा रही है। उन्होंने संस्थान के विशेषज्ञों से संसदीय बहसों, समिति रिपोर्टों और विशेषज्ञ विश्लेषणों के आधार पर एक मानक कमेंट्री तैयार करने का आह्वान किया, जो न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपयोगी मार्गदर्शिका बन सके।जस्टिस सिंह ने कहा कि फरेंसिक जांच में किसी भी तरह की चूक पूरी जांच को प्रभावित कर सकती है। इस मौके पर उन्होंने सेंटर ऑफ एक्सपीरियंस फॉर आईटी-ओटी सिक्यॉरिटी ऐंड फरेंसिक्स का शुभारंभ भी किया। प्रो.पवन शर्मा ने उद्योग जगत की अपेक्षाओं, छात्र नवाचारों और मेंटरशिप की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की भर्ती प्रक्रिया में केवल जीपीए नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और संपूर्ण समझ अधिक महत्वपूर्ण है। वहीं, अहमदाबाद के आईजी राघवेंद्र वत्स ने फरेंसिक विज्ञान और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में अंतर्विषयक शिक्षा तथा उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पर जोर दिया।