दिल्ली के व्यापारी चाहते हैं कांग्रेस की रैली स्थगित हो, दिवाली के बाद आयोजन की मांग
दिल्ली के व्यापारी चाहते हैं कांग्रेस की रैली स्थगित हो, दिवाली के बाद आयोजन की मांग
NewsPoint•
दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को स्थगित करने की मांग फिर से की है। व्यापारियों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे इस पर विचार करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि अगर रैली दिवाली से पहले होती है, तो उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। उनका अनुरोध है कि यह रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि उनका अंतिम निर्णय कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के साथ बातचीत के बाद होगा। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा, "मल्लिकार्जुन खड़गे के इस बयान से दिल्ली के व्यापारियों में आशा की किरण जगी है। हम उनके इस संवेदनशील रवैये का दिल से स्वागत करते हैं।"सीटीआई ने खड़गे को पत्र लिखकर निवेदन किया है, "आपकी अगली मीटिंग में आप दिवाली के पीक सीजन को देखते हुए दिल्ली के लाखों व्यापारियों की रोजी-रोटी का ख्याल रखते हुए रैली को दिवाली के बाद करने का अंतिम निर्णय लेंगे।" व्यापारियों का यह भी कहना है कि धनतेरस इस साल 6 नवंबर को है, जिस दिन दिल्ली में करीब 25 हजार करोड़ का कारोबार होता है। इसके बाद दीपावली 8 नवंबर और भैया दूज 10-11 नवंबर को है।
इस समय दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली होने से आसपास के बाजारों पर बुरा असर पड़ सकता है। सीटीआई ने कहा कि रामलीला मैदान के चारों ओर 5 किलोमीटर के दायरे में 20 बड़े होलसेल और रिटेल बाजार हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार और जामा मस्जिद जैसे स्थान शामिल हैं। इन बाजारों में लगभग 3 लाख व्यापारी काम करते हैं।
यदि व्यापारियों के परिवारों और उनके कर्मचारियों को मिलाया जाए, तो लगभग 15 लाख लोगों की रोजी-रोटी इन 20 बाजारों से जुड़ी हुई है। सीटीआई ने कहा कि जब 10 लाख लोगों की महारैली होगी, तो इसका प्रभाव सिर्फ रामलीला मैदान पर नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली के अन्य बाजारों पर भी पड़ेगा। इससे बाजार में बहुत भीड़ भाड़ और पैनिक पैदा हो सकता है।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने मल्लिकार्जुन खड़गे से निवेदन किया, "हम नहीं चाहते कि दिवाली पीक सीजन में फिर वही हालात बनें।" जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर को जो धरना हुआ था, उसमें जिस तरह से दिल्ली में स्थिति बदतर हो गई थी, उसका भी जिक्र व्यापारियों ने किया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में पहले ही व्यापारियों को 3 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है।
बाजारों में खुदरा विक्रेताओं की चिंता स्पष्ट है। व्यापारी यह चाहते हैं कि उनका दिवाली का पीक सीजन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े। वह इस बात पर जोर देते हैं कि यदि कांग्रेस की रैली दिवाली के बाद होती है, तो यह व्यापार के हित में है। इस समय व्यापारी उत्सव की तैयारी में जुटे हैं और ऐसे में रैली होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
व्यापारी संगठनों की इस मांग पर कांग्रेस के नेताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए। इस रैली के आयोजन के बारे में निर्णय लेते समय व्यापारियों की रोजी-रोटी और त्योहार की अहमियत को ध्यान में रखना आवश्यक है।