पोप लियो XIV की यमन के ताइज में संघर्ष खत्म करने की अपील, ओमान का समर्थन

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नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। यमन में जारी संघर्ष और आम लोगों की बिगड़ती स्थिति पर वेटिकन ने चिंता जताई है। पोप लियो XIV ने यमन के ताइज शहर में तुरंत संघर्ष खत्म करने की अपील की है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने इस बयान का समर्थन किया है और यह भी कहा है कि ओमान सभी नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुंचाने, बातचीत को बढ़ावा देने और तनाव कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पोप लियो XIV ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं यमन, और विशेषकर ताइज की गंभीर मानवीय स्थिति को चिंता के साथ देख रहा हूं। वहां के लोग भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। मैं पुरजोर अपील करता हूं कि लड़ाई-झगड़े बंद हों और यमन के लोगों तथा इस क्षेत्र के सभी निवासियों को शांति से जीने का अधिकार मिले।" यह अपील उस समय आई है जब यमन में संघर्ष के कारण बहुत से लोग घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर के बीच 2.60 लाख से अधिक लोग यमन में विस्थापित हुए हैं। इनमें से लगभग आधे लोग ताइज में शरण लिए हुए हैं। इन विस्थापित परिवारों को सुरक्षित आवास, भोजन और अन्य बुनियादी जरूरतों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ताइज वो क्षेत्र है जहां संघर्ष का प्रभाव आम लोगों की जिंदगी पर बहुत बुरा पड़ा है।

ताइज और उसके आसपास नागरिकों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और विस्थापित लोगों की स्थिति अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने भी ताइज की घेराबंदी खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगाई है।

ओमान लंबे वक्त से यमन संकट के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन कर रहा है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने कहा, "ताइज संघर्ष से पीड़ित लोगों के प्रति पोप का समर्थन महत्वपूर्ण है। ओमान बातचीत, तनाव कम करने और यमन के सभी लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए काम करता रहेगा।"

ये बातें एक समय पर सामने आई हैं, जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है। मस्कट ने हमेशा बातचीत और तनाव कम करने पर जोर दिया है। ओमान का प्रयास है कि सभी यमनी नागरिकों की मदद की जा सके और इस संकट को समाप्त किया जा सके। इस स्थिति में न केवल यमन के लोगों की मदद करना जरूरी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है।

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