पाकिस्तान में भुखमरी का संकट: ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 122 देशों में 106वां स्थान
पाकिस्तान में भुखमरी का संकट: ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 122 देशों में 106वां स्थान
NewsPoint•
पाकिस्तान में भुखमरी और कुपोषण का गंभीर संकट तेजी से बढ़ रहा है। यह समस्या कई वर्षों से नेताओं की अनदेखी, निर्णय लेने में धीमापन और जरूरी मुद्दों पर बात करने से बचने के कारण विकराल रूप ले चुकी है। 25 अक्टूबर को द फ्राइडे टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) में 2026 में पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया में दूसरा सबसे खराब स्थान पाया है, जहाँ उसका स्कोर 25.5 है। इस रैंकिंग में पाकिस्तान 122 देशों में 106वें स्थान पर है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान की स्थिति भयंकर है, और इसे नजरअंदाज करना कठिन हो रहा है।
रिपोर्ट के लेखक जिशान अहमद सिद्दीकी ने कहा कि पाकिस्तान में कुपोषण की समस्या पर रिपोर्टें लिखी जाती हैं, शोध होते हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस पर ध्यान देते हैं। लेकिन, जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने में सरकारें विफल रहती हैं। वह बताते हैं कि "पाकिस्तान में समस्याओं के आकलन, चेतावनियों और सुझावों की कमी नहीं रही है।" लेकिन ऐसी चेतावनियों को ज़रूरी कार्रवाई में बदलने की तत्परता खत्म हो जाती है। पाकिस्तान की समस्याएं नई नहीं हैं। सिद्दीकी बताते हैं कि "गरीबी, शिक्षा में कमी, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, बाल श्रम, खाद्य सुरक्षा की कमी, पर्यावरणीय गिरावट और बेरोजगारी जैसी समस्याएं वर्षों से मौजूद हैं।" इस दौरान सरकारें और समितियां बदलती रहीं, योजनाएं बनती रहीं और पहले से पहचानी गई समस्याओं पर नई रिपोर्टें आती रहीं।
एक बड़ा मुद्दा है कि लोग महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने से डरते हैं। अक्सर तब तक फैसले टाले जाते हैं, जब चीजें इतनी खराब हो जाती हैं कि कोई और विकल्प नहीं बचता। सिद्दीकी ने कहा कि "पाकिस्तान में भुखमरी का संकट अचानक उत्पन्न नहीं हुआ।" यह उन समस्याओं की परिणाम है, जिनकी पहचान तो की गई लेकिन जिन्हें सुलझाया नहीं गया।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान का स्कोर चार प्रमुख संकेतकों पर आधारित है। इनमें अल्पपोषण की स्थिति, बच्चों में ऊंचाई के अनुपात में कमी, वजन की कमी और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की 16.1 प्रतिशत आबादी कुपोषित है। साथ ही, पांच साल से कम उम्र के 33.6 प्रतिशत बच्चे उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या का सामना कर रहे हैं।
यहाँ एक और चिंताजनक तथ्य है। रिपोर्ट बताती है कि 9.8 प्रतिशत बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन के शिकार हैं। और सबसे दुखद यह है कि पांच साल की उम्र पूरी होने से पहले 5.6 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु हो जाती है।
पाकिस्तान में भुखमरी का मामला सिर्फ खाद्य आपूर्ति का नहीं है। यह शासन प्रणाली, जवाबदेही, प्राथमिकताओं और निर्णय लेने की प्रक्रिया से भी जुड़ी हुई है। अगर समय पर समाधान कर लिया गया होता, तो शायद आज यह इतना बड़ा संकट नहीं होता। लेकिन अब यह समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि इसे अनसुना करना मुश्किल है।
पाकिस्तान को अब इस समस्या के प्रति गंभीरता से सोचना होगा और ठोस कदम उठाने होंगे। अन्यथा, अगर यही स्थिति बनी रही तो इसके परिणाम देश के लोगों के लिए बहुत चौंकाने वाले हो सकते हैं।
पाकिस्तान के नेताओं को चाहिए कि वे अपने वादों को सच करें और लोगों की भलाई के लिए तुरंत कार्रवाई करें। यह एक ऐसा मुद्दा है जो किसी भी प्रकार की अनदेखी का और इंतजार नहीं कर सकता।