Lucknows Air Improved But What About Traffic The Story Of Becoming Number One
हवा तो सुधरी लेकिन ट्रैफिक कैसे सुधरेगा
नवभारतटाइम्स.कॉम•
तीखेलाल
तीखेलाल सुबह-सुबह टहलते हुए हीरालाल के पास पहुंचे तो चेहरे पर जबरा चमक थी।हीरालाल: काहे मियां, आज बड़े खुश नजर आ रहे हैं?
तीखेलाल: अरे पढ़ा नहीं अखबार में, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में लखनऊ को साफ हवा के मामले में नंबर वन घोषित कर दिया है।
हीरालाल: गर्दन खुजलाते हुए-अच्छा! यानी अब लखनऊ की हवा इतनी साफ हो गई कि आदमी गोमती के किनारे खड़ा होकर गहरी सांस ले और फेफड़ा खुद बोले-वाह मियां, मजा आ गया!
तीखेलाल: इतना भी उड़ने की जरूरत नहीं है। हवा की गुणवत्ता में करीब तीस फीसदी सुधार जरूर हुआ है, लेकिन पीएम-10 और पीएम-2.5 अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर हैं।
हीरालाल: तो फिर नंबर वन कैसे हो गए?
तीखेलाल: यही तो लखनवी कमाल है।
हीरालाल: चलो, कम से कम हवा ने तो लखनऊ की लाज रख ली।
तीखेलाल: लगता है, ईवी गाड़ियां और ई- रिक्शा ने भी कमाल किया है। हजारों ई-रिक्शा और तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने शहर के ट्रैफिक में धुआं जरूर घटाया होगा।
हीरालाल: लेकिन असली बीमारी तो अभी वहीं है-बड़ी गाड़ियां और बेतरतीब ट्रैफिक।
तीखेलाल: बिल्कुल। आप 10 ई-रिक्शा सड़क पर लगा दीजिए और उनके बीच एक डीजल की भारी-भरकम गाड़ी धुआं छोड़ती हुई निकल जाए तो सारी नेकनामी वहीं उड़ जाएगी।
हीरालाल: और ट्रैफिक ऐसा कि गाड़ी चलाने वाला आधा समय सड़क पर और आधा समय सोचने में लगाता है कि जाना किधर है! किधर मुड़ें और जो पहले रास्ता था, वह कहां गया?
तीखेलाल: यही असली सुधार का रास्ता है। सिर्फ हवा को साफ करने से काम नहीं चलेगा, हवा खराब करने वाली वजहों को भी साफ करना पड़ेगा।
हीरालाल: मतलब?
तीखेलाल: मतलब, बड़ी गाड़ियों की बढ़ती संख्या पर काबू किया जाए, ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन, जाम कम करना, सार्वजनिक परिवहन मजबूत करना और सड़क की धूल पर लगातार काम हो।
हीरालाल: नंबर वन की खुशी मनाइए, लेकिन नंबर वन बने रहने की तैयारी भी करिए।
तीखेलाल: लखनऊ की हवा सुधर रही है मियां। अब बस ट्रैफिक को भी समझा दीजिए कि वह हवा की इस इज्जत का कबाड़ा न करे!
हीरालाल: ट्रैफिक को समझाना? अरे मियां, पहले लखनऊ वालों को ही समझा लो, यहां हर आदमी सड़क पर अपने को वीआईपी समझता है!