Fee On Upi What Is The New Rule For Customers And Merchants Know Everything
यूपीआई तो मुफ्त चाहिए और सुरक्षित भी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
तीखेलाल
तीखेलाल: हीरालाल, सुना तुमने? अब दो हजार से ऊपर यूपीआई करोगे तो मर्चेंट से फीस की बात चल रही है।हीरालाल ने चाय में बिस्कुट डुबाते हुए कहा- अरे भइया, बात मर्चेंट की है या ग्राहक की?
तीखेलाल: यही तो असली खेल है। सरकार कह रही है कि ग्राहक से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। दो हजार तक के भुगतान भी मुफ्त। इससे ज्यादा का भुगतान किसी दुकानदार को किया तो दुकानदार से 0.4 फीसदी MDR लिया जाएगा।
हीरालाल: मतलब हम पांच हजार का सामान खरीदें तो दुकानदार से फीस की बात होगी, हमसे नहीं? तो दुकानदार क्या करेगा?
तीखेलाल: बस यही तो चिंता की बात है। दुकानदार कह रहे हैं कि भइया, हम अपनी जेब से तो देंगे नहीं। कहीं से तो निकालेंगे।
हीरालाल: फिर ग्राहक कहेगा-भइया, क्यूआर कोड हटाओ, पुराना खाता निकालो।
तीखेलाल: मजाक अपनी जगह है, असली चिंता दूसरी है। यूपीआई जितना आसान हुआ है, साइबर ठग भी उतने ही स्मार्ट हो गए हैं। खासकर हम बुजुर्ग तो रोजाना लूटे जा रहे हैं।
हीरालाल: सही कह रहे हो। पहले ठग गली में आते थे, अब मोबाइल में घुस आते हैं। कभी बैंक वाला बनकर, कभी बिजली वाला, कभी केवाईसी वाला। कितनी भी सतर्कता बरतो, कोई न कोई फंस ही जाता है।
तीखेलाल: और सबसे खतरनाक बात, बुजुर्गों को डराकर जल्दी में भुगतान करवा देते हैं। कोई कहता है आपका अकाउंट बंद हो जाएगा, कोई कहता है पुलिस केस है, कोई कहता है पैसे वापस लेने के लिए क्यूआर स्कैन करिए।
हीरालाल: अरे, पैसे लेने के लिए यूपीआई पिन थोड़े ही डालना पड़ता है!
तीखेलाल: यह बात तो हर घर में बड़े अक्षरों में लिखी होनी चाहिए। पैसा पाना हो तो पिन नहीं देना है। अनजान क्यूआर मत स्कैन करो, ओटीपी किसी को मत बताओ और फोन पर आए अंजान लिंक को मत खोलो।
हीरालाल: मेरे हिसाब से हर बैंक को अपने बुजुर्ग ग्राहकों के लिए यूपीआई पाठशाला खोल देनी चाहिए।
तीखेलाल: और बच्चों को भी जिम्मेदारी देनी चाहिए। जैसे मां-बाप ने उन्हें बचपन में साइकल चलाना सिखाया था, अब बच्चे अपने मां-बाप को यूपीआई चलाना सिखाएं।
हीरालाल: और फ्रॉड हो जाए तो ?
तीखेलाल: तुरंत बैंक को बताओ और 1930 पर शिकायत करो। देर करोगे तो पैसा ठगों के पास चला जाएगा।
हीरालाल: तो निष्कर्ष यही कि यूपीआई मुफ्त रहे और अक्ल के दरवाजे हमेशा खुले रखने हैं।
तीखेलाल: और दुकानदार ग्राहक से एमडीआर मांगें तो?
हीरालाल: कह देना-भइया, मर्चेंट का डिस्काउंट रेट आप जानो, हमारी जेब का हाल हम जानें। यूपीआई मुफ्त है तो मुफ्त ही रहने दो।