डिजिटल से उपाय

नवभारतटाइम्स.कॉम•
bank strike digital solutions and demand for two days holiday
एक दशक पहले, नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान जब बैंकिंग सेवाओं पर दबाव बढ़ गया था, तो शनिवार और रविवार को भी बैंक खुले थे। इस रविवार को भी बैंकों में कामकाज हुआ और वजह है यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की बुलाई तीन दिनों की हड़ताल, जो आज से शुरू हो रही है।

ऑनलाइन सुविधाएं । UFBU बैंक यूनियनों का साझा मंच है और उसका दावा है कि वह बैंकिंग क्षेत्र के 90% से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। हड़ताल ऐसे समय हो रही है, जब महीने के अंत में वेतन और कई दूसरे भुगतान के कारण बैंकिंग सेवाओं पर दबाव सामान्य से ज्यादा रहता है। हालांकि नेट बैंकिंग , UPI और ATM जैसी डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बड़ी संख्या में ग्राहकों को इसका सीधा असर शायद महसूस न हो।
दो दिन छुट्टी । लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि हड़ताल सामान्य बात है या यूनियन की मांगों को समझने की जरूरत नहीं। यूनियन की मांगें पुरानी हैं और उसमें सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है हफ्ते में दो दिन छुट्टी की। बैंक कर्मियों का कहना है कि उन पर काम का बोझ बेहद बढ़ गया है और हफ्ते में दो दिन आराम से वर्क-लाइफ बैलेंस में मदद मिलेगी।

कर्मचारी घटे, काम बढ़ा । ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर के बैंकों में एक कर्मचारी को औसतन दो हजार ग्राहकों को संभालना पड़ता है, जबकि प्राइवेट बैंकों में यह औसत 400-500 है। ऊपर से स्थायी कर्मचारियों की संख्या घटी है, जबकि आउटसोर्स पर निर्भरता बढ़ी है। सरकारी बैंक कर्मियों को जनधन खातों से लेकर किसान सम्मान निधि और मुद्रा लोन तक, तमाम सरकारी योजनाएं संभालनी पड़ती हैं। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत ही पिछले साल अगस्त तक 56 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुल चुके थे।

नेट बैंकिंग । पब्लिक सेक्टर और रीजनल रूरल बैंक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हाल के बरसों में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ी है पर दूरदराज के इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी जिम्मेदारी सरकारी बैंकों ने ही संभाल रखी है। जनधन के 78% खाते इन्हीं इलाकों में हैं। बैंकों में छुट्टियां बढ़ने पर इन क्षेत्रों पर असर ज्यादा पड़ सकता है। इसका एक उपाय यह है कि इंटरनेट सेवाओं को बेहतर करने के साथ लोगों को नेट बैंकिंग के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि उन्हें हर छोटे काम के लिए बैंक न जाना पड़े। इससे कर्मचारियों पर भी दबाव घटेगा। हालांकि इसके साथ एक चुनौती इन लोगों को साइबर अपराधियों से बचाने की भी आएगी, और वह तैयारी भी साथ में ही चलनी चाहिए।