प्रेत संवाद

नवभारतटाइम्स.कॉम•
ghost dialogue protest of veiled women from dark corners
शाम को पार्क में टहलने निकला तो कॉलोनी की सोसायटी के अध्यक्ष जी ने बताया कि शाम 7 बजे के बाद पार्क में घूमना मना है। वह जानते थे कि यह आदमी मानेगा नहीं तो उन्होंने जोड़ा, 'पार्क के उस अंधेरे कोने में प्रेतों का साया है। घूंघट में एक महिला घूमती देखी गई है।' डरने के बजाय मुझे गुस्सा आ गया, 'मरने के बाद भी महिला को अंधेरे में रखा है और उसका घूंघट भी नहीं हटा।' अध्यक्ष जी झल्लाते हुए बोले, 'वहां मर्द प्रेत भी तो हैं।' मुझे बात तार्किक लगी। हो सकता है प्रेतों में महिला का ससुर हो या जेठ या कोई नेता जो कहता हो कि महिलाओं को पर्दे में रहना चाहिए।

उस रात वह महिला अपनी कई सहेलियों के साथ सपने में आई। उनमें से एक बोली, 'हम प्रोटेस्ट करना चाहते हैं।' 'मांग क्या है?' 'हमें मरने के बाद तो घूंघट हटाने का अधिकार होना चाहिए।' 'अब तो आप भूत हैं। आपके अधिकारों पर हम इंसानों का कोई जोर नहीं।' वह बोली, 'हममे से कुछ ने बाल खोलकर सफेद साड़ी में घूमने की कोशिश की, पर कुछ लोगों ने पीछा नहीं छोड़ा। डरकर हमें पार्क के अंधेरे हिस्सों में जाना पड़ा और घूंघट पहनना पड़ा।' मैंने कहा, 'देखिए, इंसानों की बात तो सरकार सुन नहीं रही। शायद आपका ही कोई जंतर या मंतर चल जाए।' मर चुकी महिलाओं ने प्रोटेस्ट किया। भूख हड़ताल तो वे कर नहीं सकती थीं। वहां उन्होंने देखा कि कुछ बच्चे धरने पर बैठे थे। हालांकि वे जीवित नहीं थे। उनकी मांगें थीं- एजुकेशन सिस्टम सही करो, नौकरी दो। हमें पढ़ाओ, मारो नहीं। वे द्रवित होकर लौट गईं। उन्होंने कहा, 'यह समाज रहने लायक नहीं, हम अंधेरे कोनों में ही सही हैं। उजाले में दिक्कतें ज्यादा हैं।'