सड़क परिवहन मंत्रालय का टू व्हीलर रोड एंबुलेंस प्रस्ताव: दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी गति
सड़क परिवहन मंत्रालय का टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस प्रस्ताव: दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी गति
NewsPoint•
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को 'टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस' को औपचारिक मान्यता देने और इसके लिए नियम बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है, खासकर दुर्गम इलाकों में, जहां पारंपरिक एंबुलेंस के पहुंचने में दिक्कतें आती हैं। इस नई व्यवस्था से ग्रामीण, सुदूर और पहाड़ी इलाकों में लोगों को तेजी से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। मंत्रालय ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि इन खास एंबुलेंस के लिए अभी तक कोई समर्पित नियामक ढांचा नहीं था, जो इन्हें डिजाइन, सुरक्षा, पंजीकरण और फिटनेस जैसे मामलों में राष्ट्रीय मानकों के तहत लाता।
मंत्रालय ने इस कमी को दूर करने के लिए एआईएस-209 (भाग 1):2026 नाम का एक नया मानक अपनाने का प्रस्ताव दिया है। यह मानक खास तौर पर जीवन रक्षक टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस के निर्माण और उनके काम करने के तरीकों के बारे में नियम तय करेगा। इस नए नियम के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2027 के बाद बनने वाली सभी एल2-श्रेणी की टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को इस नए मानक का पालन करना होगा। साथ ही, इन एंबुलेंस पर लगी आपातकालीन चेतावनी वाली लाइटों को भी उसी तारीख से तय मानकों को पूरा करना होगा।यह प्रस्ताव टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को एक खास तरह का वाहन मानता है, जो मुश्किल रास्तों और संकरी गलियों में भी आसानी से पहुंच सकता है। ऐसे इलाकों में जहां बड़ी एंबुलेंस नहीं जा पातीं, वहां ये छोटी एंबुलेंस बहुत मददगार साबित होंगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे आपातकालीन स्थिति में मदद मिलने का समय काफी कम हो जाएगा और स्वास्थ्य सेवाएं आखिरी व्यक्ति तक भी पहुंच पाएंगी।
प्रस्तावित नियमों में राज्यों की सरकारों को भी कुछ छूट दी गई है। राज्य सरकारें अपनी स्थानीय जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यह तय कर सकेंगी कि इन टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को किन-किन इलाकों में तैनात किया जाए। यानी, हर राज्य अपनी सुविधा के हिसाब से इन एंबुलेंस का इस्तेमाल कर सकेगा।
मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को 'परिवहन वाहन' माना जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें भी बाकी वाहनों की तरह फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होगा और हर दो साल में उसे रिन्यू कराना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि ये एंबुलेंस हमेशा अच्छी स्थिति में रहें और आपातकालीन सेवाओं के लिए तैयार रहें।
फिलहाल, इन टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत कोई अलग पहचान नहीं मिली है। इसी वजह से इनके डिजाइन, सुरक्षा, पंजीकरण और फिटनेस को लेकर कोई राष्ट्रीय स्तर के तय नियम नहीं थे। इस प्रस्ताव से इन सभी चीजों के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार हो जाएगा।
यह पहल उन लोगों के लिए बहुत राहत की बात होगी जो दूरदराज के इलाकों में रहते हैं और जिन्हें अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस की मदद से वे तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकेंगे, जिससे जान बचाने में आसानी होगी। यह भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम रूप देने से पहले इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। लेकिन, जिस तरह से इसे पेश किया गया है, उससे लगता है कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था कैसे लागू होती है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ता है।