संजय निरुपम ने नाना पटोले के पैर धोने वाले वीडियो की निंदा की, सिद्धिविनायक मंदिर दान चोरी पर भी बोले

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Navbharat Times
मुंबई, 3 अगस्त। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने सोमवार को एक ऐसे वीडियो की कड़ी निंदा की जिसमें कांग्रेस नेता नाना पटोले का गुरु पूर्णिमा के मौके पर पैर धोए जा रहे थे। उन्होंने इस घटना को 'बेहद शर्मनाक' बताया। यह वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसमें दो लोग कांग्रेस नेता नाना पटोले के पैर धोते हुए दिख रहे हैं। भाजपा ने इस घटना को कांग्रेस की संस्कृति का आईना बताते हुए इसका मजाक उड़ाया है। हालांकि, नाना पटोले ने बचाव करते हुए कहा कि पैर छूने वाले उनके परिवार के युवा सदस्य थे।

वायरल वीडियो में पटोले सोफे पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि दो लोग उनके पैर धो रहे हैं और उन पर फूल बरसा रहे हैं। रस्म के तौर पर उनके पैरों के पास फल भी रखे गए थे। निरुपम ने इस बारे में बात करते हुए कहा, "नाना पटोले का यह वीडियो बेहद शर्मनाक है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके तथाकथित शिष्य उनके पैर दूध से धोते हुए दिखाई दे रहे हैं। बाबा राम रहीम और बाबा रामपाल की तरह नाना पटोले भी घमंड से भरे रवैये के साथ मोबाइल पर स्क्रॉल करते हुए बैठे हैं। सबसे पहले तो पैर दूध से धुलवाना किसी आध्यात्मिक गुरु के लिए भी उचित नहीं है, राजनेता की तो बात ही छोड़िए। गुरु पूर्णिमा पर गुरु के प्रति आदर दिखाया जा सकता है, लेकिन इस तरह से पैर दूध से धोने का क्या अर्थ है?"
निरुपम ने बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छा निर्णय है। अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी के विरोध में उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह महज एक नाटक था।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह विरोध प्रदर्शन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अपमानजनक था। निरुपम ने कहा, "मेरा मानना है कि वह प्रस्तुति संपूर्ण सनातन धर्म का अपमान थी। भगवा वस्त्र पहने पप्पू यादव ने साधु का रूप धारण किया और ऐसा अभिनय किया मानो वह दान की रकम चुरा रहा हो। राहुल गांधी भी इस प्रस्तुति का हिस्सा बने। उन्होंने दान करते हुए एक भक्त की भूमिका निभाई, जिसे बाद में पप्पू यादव के किरदार द्वारा चुराया हुआ दिखाया गया।"

वहीं, सिद्धिविनायक मंदिर में तथाकथित चढ़ावा चोरी मामले में संजय निरुपम ने कहा, "अगर हमारे किसी मंदिर में दान किया गया पैसा चोरी हो जाता है, तो इससे बड़ा पाप कोई नहीं हो सकता। ऐसी अपुष्ट जानकारी है कि सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों ने हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान इस ओर दिलाया है कि मंदिर को मिले दान के पैसे का एक बड़ा हिस्सा शायद गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। राज ठाकरे ने इसे एक बड़ा मुद्दा बताया। राज ठाकरे की पार्टी के एक नेता ने पहले आरोप लगाया था, जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, कि सिद्धिविनायक मंदिर में दिए जाने वाले दान में बड़े पैमाने पर चोरी और भ्रष्टाचार हो रहा था।"

एक अन्य सवाल के जवाब में शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, "बहुत जल्द संसद में एफसीआरए कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। एफसीआरए, यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act) में एक बड़ा संशोधन प्रस्तावित है। इस संशोधन के बाद, कई संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव रखा जाएगा, जिनमें मिशनरी समूह और मानवाधिकार व नागरिक स्वतंत्रता के नाम पर काम करने वाले कई एनजीओ शामिल हैं, जिन्हें विदेशी कंपनियों और विदेशी सरकारों से बड़े पैमाने पर फंडिंग मिलती है।"

यह पूरा मामला गुरु पूर्णिमा के मौके पर कांग्रेस नेता नाना पटोले के पैर धोने के एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ। इस वीडियो में दो लोग पटोले के पैर धोते और उन पर फूल बरसाते हुए दिख रहे हैं। इस पर शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'बेहद शर्मनाक' बताया। उन्होंने इस कृत्य की तुलना बाबा राम रहीम और बाबा रामपाल जैसे विवादित गुरुओं से की और कहा कि यह किसी भी राजनेता के लिए उचित नहीं है, भले ही वह गुरु पूर्णिमा का अवसर हो। निरुपम ने इस बात पर जोर दिया कि गुरु के प्रति सम्मान दिखाने के कई तरीके हैं, लेकिन पैर धोना, खासकर दूध से, अनुचित है।

इस घटना पर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और इसे 'कांग्रेस संस्कृति' का प्रतिबिंब बताया। हालांकि, नाना पटोले ने खुद इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि पैर धोने वाले लोग उनके परिवार के युवा सदस्य थे, जो गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे। लेकिन निरुपम ने इस सफाई को स्वीकार नहीं किया और पटोले के व्यवहार को 'घमंड से भरा' बताया।

इसके अलावा, निरुपम ने पप्पू यादव और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इस FIR को 'बहुत अच्छा निर्णय' बताया। निरुपम के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी के विरोध में पप्पू यादव और राहुल गांधी द्वारा किया गया प्रदर्शन केवल एक 'नाटक' था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन सनातन धर्म के अनुयायियों का अपमान था। निरुपम ने विस्तार से बताया कि कैसे पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर एक साधु का रूप धारण किया और ऐसा अभिनय किया जैसे वह दान की रकम चुरा रहा हो, जबकि राहुल गांधी ने दान करने वाले भक्त की भूमिका निभाई। निरुपम ने इस पूरे कृत्य को सनातन धर्म का अपमान करार दिया।

सिद्धिविनायक मंदिर में कथित तौर पर दान की चोरी के मामले पर भी निरुपम ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी मंदिर में दान का पैसा चोरी होता है तो यह बहुत बड़ा पाप है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अपुष्ट जानकारी मिली है कि सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सूचित किया है कि मंदिर को मिले दान का एक बड़ा हिस्सा शायद गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। इस मुद्दे को राज ठाकरे ने भी उठाया था और उनकी पार्टी के एक नेता ने पहले आरोप लगाया था कि जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब सिद्धिविनायक मंदिर में दान में बड़े पैमाने पर चोरी और भ्रष्टाचार हो रहा था।

अंत में, निरुपम ने एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल्द ही संसद में एफसीआरए कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस संशोधन के तहत, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में बड़े बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद, कई ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिनमें मिशनरी समूह और मानवाधिकार व नागरिक स्वतंत्रता के नाम पर काम करने वाले कई एनजीओ शामिल हैं। इन संगठनों को विदेशी कंपनियों और विदेशी सरकारों से भारी मात्रा में फंडिंग मिलती है। यह संशोधन इन संगठनों की फंडिंग पर नकेल कसने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।