इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर हमला किया, युद्धविराम का उल्लंघन जारी

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 3 अगस्त: इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम एक बार फिर टूट गया है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के टायर, मरजायून और बिंत जबील जैसे शहरों पर हमला बोल दिया है। यह ताजा हमला लेबनान से सोमवार को आई रिपोर्टों के अनुसार हुआ, जिसमें इन शहरों के इलाकों और आसपास के गांवों को निशाना बनाया गया। इजरायली ड्रोन ने नबातियेह के अली अल-ताहर पहाड़ी क्षेत्र पर भी बमबारी की और विस्फोटक व आग लगाने वाले हथियार गिराए। चामा गांव में इजरायली सेना ने तोपों से गोले दागे, जबकि तैयबे और यारून गांवों में जैतून के बागों में आग लगा दी गई। यह लड़ाई दो मार्च को फिर से शुरू हुई थी, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए थे। हिजबुल्लाह का कहना था कि ये हमले लेबनान पर इजरायल के लगातार हो रहे हमलों के जवाब में थे।

ईरान के नेता आयतुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की हत्या के बाद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 16 अप्रैल को इजरायल और लेबनान युद्धविराम पर सहमत हुए थे, लेकिन इस समझौते का कई बार उल्लंघन हुआ। 26 जून को, अमेरिका की मध्यस्थता में वॉशिंगटन में दोनों पक्षों ने एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत इजरायली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना था और उनकी जगह लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती होनी थी। हालांकि, हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने इस समझौते को इजरायल के सामने आत्मसमर्पण बताया था।
इजरायल और लेबनान सरकार के बीच 16 अप्रैल को जो युद्धविराम समझौता हुआ था, उसका मुख्य उद्देश्य इजरायली प्रशासन और हिजबुल्लाह प्रतिरोध आंदोलन के बीच चल रही लड़ाई को खत्म करना था। लेकिन युद्धविराम के बावजूद, इजरायल दक्षिणी लेबनान में रुक-रुक कर हमले करता रहा है। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्टों के अनुसार, यह ताजा हमला भी इसी क्रम का हिस्सा है।

यह स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास बार-बार विफल हो रहे हैं। ताजा हमलों में जिन शहरों और गांवों को निशाना बनाया गया है, वे दक्षिणी लेबनान के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इजरायली ड्रोन का इस्तेमाल और आग लगाने वाले हथियारों का प्रयोग स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर किए गए हमले, लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों का जवाब बताए जा रहे हैं। यह एक खतरनाक चक्र है जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। इस तरह के हमलों से आम नागरिकों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है।

वॉशिंगटन में हुआ रूपरेखा समझौता एक उम्मीद की किरण था, लेकिन हिजबुल्लाह के महासचिव की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि इस समझौते को लेकर अभी भी मतभेद हैं। इजरायली सैनिकों की वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती का विचार शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता था, लेकिन अगर इसे आत्मसमर्पण के रूप में देखा जाएगा तो इसका कार्यान्वयन मुश्किल होगा।

कुल मिलाकर, इजरायल और लेबनान के बीच की स्थिति नाजुक बनी हुई है। युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन और ताजा हमले इस बात का संकेत देते हैं कि क्षेत्र में शांति स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने और दोनों पक्षों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।