युगांडा ने इबोला प्रकोप पर काबू पाया, अफ्रीका सीडीसी ने की सराहना

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Navbharat Times
अफ्रीका सीडीसी ने युगांडा के इबोला प्रकोप को सफलतापूर्वक काबू करने की तारीफ की है। संस्था ने सोमवार को कहा कि युगांडा ने मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व और सभी पक्षों के मिले-जुले प्रयासों से इस पर जीत हासिल की। अफ्रीका सीडीसी के डायरेक्टर-जनरल जीन कासेया ने सोशल मीडिया पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे संक्रमणों को रोकने के लिए लगातार तैयारी, सतर्क निगरानी और सीमाओं के बीच बेहतर तालमेल बहुत ज़रूरी है। वहीं, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप देश के इतिहास का सबसे बड़ा बन गया है, जिसने 2018-2020 के पिछले बड़े प्रकोप को भी पीछे छोड़ दिया है।

अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने युगांडा की इबोला प्रकोप से निपटने की शानदार कोशिशों की सराहना की है। सोमवार को जारी एक बयान में, संस्था ने कहा कि युगांडा ने अपने मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व और सभी संबंधित पक्षों के एकजुट प्रयासों से इस बीमारी पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। अफ्रीका सीडीसी के डायरेक्टर-जनरल जीन कासेया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक् स' पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने कंपाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब् ल् यूएचओ) के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकुब जनाबी और युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक की सह-अध्यक्षता की थी। कासेया ने लिखा, "हमने युगांडा की सराहना की, जिसने मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व और समन्वित प्रयासों के जरिए इबोला प्रकोप को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।"
कासेया ने इस बात पर जोर दिया कि इस सफलता को बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भविष्य में संक्रमण को फैलने से रोकने और पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार तैयारी, सतर्क निगरानी और सीमापार बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। स िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, युगांडा ने 28 जुलाई को आधिकारिक तौर पर इबोला प्रकोप के खत्म होने की घोषणा की थी। यह घोषणा डब् ल् यूएचओ द्वारा तय की गई 42 दिनों की मानक निगरानी अवधि पूरी होने से पहले ही कर दी गई थी। युगांडा ने अपना आखिरी इबोला मरीज 16 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी थी, जब उसकी रिपोर्ट वायरस के लिए नेगेटिव आई थी।

इसके विपरीत, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में चल रहा इबोला प्रकोप अब देश के इतिहास का सबसे बड़ा प्रकोप बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब् ल् यूएचओ) ने शनिवार को बताया कि यह प्रकोप 2018 से 2020 के बीच फैले पिछले बड़े प्रकोप से भी आगे निकल चुका है। डब् ल् यूएचओ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार तक डीआरसी में बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाली इबोला बीमारी के 3,605 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। इनमें से 1,587 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसका मतलब है कि मृत्यु दर लगभग 44 प्रतिशत रही है।

इससे पहले, देश का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप 2018-2020 के दौरान पूर्वी हिस्से में फैला था, जिसमें 3,317 पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे। मौजूदा प्रकोप शुरुआत में इतुरी प्रांत के मोंगब्वालु स्वास्थ्य क्षेत्र तक ही सीमित था। लेकिन पिछले दो महीनों में यह तेजी से फैलकर पांच प्रांतों के 49 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच गया है। इन प्रांतों में इटुरी, नॉर्थ किवू, साउथ किवू, ट-उएले और शोपो शामिल हैं।

इस प्रकोप का असर स्वास्थ्यकर्मियों पर भी बहुत गंभीर रूप से पड़ा है। अब तक 151 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं और दुर्भाग्यवश, 44 की मौत हो चुकी है। डब् ल् यूएचओ का कहना है कि यह स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण उपायों में अब भी मौजूद कमियों को उजागर करता है। यह स्थिति दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की कितनी जरूरत है।