प्रधानमंत्री मोदी का पत्र पाकर भावुक हुए मदुरै के छोटे कारोबारी नेशनलम मणि, जानें क्या है पूरा मामला
प्रधानमंत्री मोदी का पत्र पाकर भावुक हुए मदुरै के छोटे कारोबारी नेशनलम मणि, जानें क्या है पूरा मामला
NewsPoint•
मदुरै के एक छोटे दुकानदार नेशनलम मणि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक व्यक्तिगत पत्र मिला है, जिसने उन्हें भावुक कर दिया है। केंद्र सरकार की एक योजना के तहत मिले लोन की मदद से अपना छोटा कारोबार चलाने वाले मणि ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए एक पत्र लिखा था, जिसके जवाब में उन्हें सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से यह पत्र प्राप्त हुआ। यह पत्र उनके लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है और वे इसे जीवनभर नहीं भूलेंगे।
नेशनलम मणि ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उनके पिता ने वर्ष 1962 में इस छोटी दुकान की शुरुआत की थी। समय के साथ उनका परिवार बढ़ा और दुकान का भी धीरे-धीरे विस्तार होता गया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शून्य शेष राशि वाले बैंक खाते खोलने की योजना शुरू की, तब वह भी बैंक खाता खुलवाने गए थे। उसी दौरान उन्हें रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों के लिए उपलब्ध लोन योजना की जानकारी मिली।मणि ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 10 हजार रुपए का लोन लिया और समय पर चुका दिया। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपए का लोन लिया और उसका भी भुगतान कर दिया। फिर उन्होंने 50 हजार रुपए का लोन लिया, जिसे भी पूरी तरह चुका दिया। इसके बाद उन्होंने फिर से लोन की मांग की। अधिकारियों ने उन्हें एक महीने इंतजार करने को कहा। एक महीने के भीतर ही उन्हें फोन आया और केनरा बैंक के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपए का चौथा लोन स्वीकृत कर दिया गया, जिसकी किस्तें वे वर्तमान में चुका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह योजना उनके जीवन के लिए किसी सहारे से कम नहीं रही। कम ब्याज पर जरूरत के समय लोन मिलने से वे अपना कारोबार सुचारु रूप से चला पाए और अपने परिवार का पालन-पोषण बिना किसी बड़ी कठिनाई के कर सके। यह योजना उनके जैसे लाखों छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हुई है।
मणि ने आगे बताया कि एक दिन उन्होंने अखबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक साक्षात्कार पढ़ा, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने देश भर के रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को लाखों करोड़ रुपए के लाभ पहुंचाए हैं। यह पढ़ने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, "मेरी दुकान पर आने वाले एक ग्राहक ने अंग्रेजी में एक छोटा-सा धन्यवाद पत्र तैयार करने में मेरी मदद की। मैंने उसे टाइप करके दिल्ली भेज दिया।"
मणि ने आगे बताया कि दिल्ली में अधिकारियों ने उनका पत्र पढ़ा और उनसे सीधे फोन पर बात भी की। इसके लगभग 10 से 15 दिन बाद उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जवाबी पत्र मिला। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रशंसा और जवाबी पत्र मिलना उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान है। वे इसे जीवनभर नहीं भूलेंगे। यह पत्र उनके लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है।
मणि ने बताया कि जब उनके पास कूरियर पहुंचा तो आसपास के लोगों ने कहा कि शायद इसमें कोई आर्थिक सहायता होगी, लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री का पत्र ही सबसे बड़ा उपहार साबित हुआ। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से ही कई योजनाओं के माध्यम से मेरी मदद कर रहे हैं। उन्होंने केवल मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरे जैसे देश भर के लाखों रेहड़ी-पटरी कारोबारियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।"
उन्होंने सभी छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से अपील करते हुए कहा कि यदि सभी लोग इस योजना के नियमों का सही ढंग से पालन करेंगे और सहयोग करेंगे, तो यह योजना आगे और मजबूत होगी तथा अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। यह योजना वास्तव में छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से मिला यह पत्र नेशनलम मणि के लिए सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास और सम्मान का प्रतीक है जो उन्हें सरकार से मिला है। यह दर्शाता है कि सरकार छोटे से छोटे नागरिक की बातों को सुनती है और उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करती है। मणि की कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं और अपनी मेहनत से जीवनयापन कर रहे हैं।
यह योजना, जिसे 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (PM SVANidhi) के नाम से भी जाना जाता है, विशेष रूप से कोरोना महामारी के दौरान प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उन्हें कार्यशील पूंजी प्रदान करना है ताकि वे अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकें और अपनी आजीविका कमा सकें। इस योजना के तहत, बिना किसी गारंटी के 10,000 रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है, जिसे एक साल की अवधि में चुकाना होता है। समय पर भुगतान करने पर ब्याज में सब्सिडी भी मिलती है।
नेशनलम मणि जैसे लोगों के लिए, यह योजना सिर्फ एक लोन नहीं है, बल्कि यह उनके सपनों को पूरा करने का एक जरिया है। यह उन्हें आत्मविश्वास देता है और उन्हें यह महसूस कराता है कि वे अकेले नहीं हैं। प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत पत्र इस विश्वास को और मजबूत करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यह एक ऐसा उदाहरण है जो दिखाता है कि कैसे सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।