राम मंदिर चढ़ावे में अनियमितताओं पर राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 4 अगस्त। मंगलवार को राज्यसभा में राम मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही स्थगित करनी पड़ी। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों से भगवान राम पर दिए गए पूर्व बयानों के लिए माफी मांगने की मांग की। इस हंगामे के चलते सभापति सीपी राधाकृष्णन को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन और उसके प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है और केंद्र सरकार द्वारा गठित इस ट्रस्ट में मिले बहुमूल्य उपहारों, नकद दान, जमीन की खरीद और उसके प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। खड़गे ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था और प्रधानमंत्री ने स्वयं सदन में इसकी घोषणा की थी। सरकार ने ट्रस्ट को 70 एकड़ से अधिक भूमि भी सौंपी थी। भूमि पूजन से लेकर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा तक, हर महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित रहे। इसलिए, खड़गे के अनुसार, राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े इस पूरे मामले पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
खड़गे के वक्तव्य के बाद सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी-अपनी सीटों से उठकर शोर मचाना और नारेबाजी करना शुरू कर दिया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से आगे आ गए, वहीं सत्ता पक्ष के सांसद भी ऐसा ही करते नजर आए। इस हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दल, राम मंदिर के विरोध में थे। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने भगवान राम को काल्पनिक बताया था और राम मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए हाथ पर काली पट्टी बांधकर आते थे। रिजिजू ने मांग की कि इन दलों को भगवान राम को लेकर दिए गए अपने उन बयानों पर माफी मांगनी चाहिए।

रिजिजू ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता इस मुद्दे को लेकर संसद के बाहर भी हंगामा करते हैं और सदन को चलने नहीं देते। उन्होंने आरोप लगाया कि वे दूसरे सदस्यों की बात भी नहीं सुनते और सिर्फ खुद ही बोलना चाहते हैं। सभापति महोदय, नेता प्रतिपक्ष होने के नाते इन्हें जितना समय दिया जाता है, उसका हर बार दुरुपयोग किया जाता है। हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते। रिजिजू ने इस बात पर भी जोर दिया कि बाकी सदस्यों ने भी नोटिस दिए हुए हैं और उन्हें भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बार नियमों का नाम लेकर ये खड़े हो जाते हैं और रोज एक ही मुद्दा उठाते रहते हैं। यह नहीं होगा, यह नहीं चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सदन सभी सदस्यों का है, केवल नेता प्रतिपक्ष का नहीं। इसलिए, उन्हें इस तरह बार-बार बोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। रिजिजू का कहना था कि ये वहीं लोग हैं जो राम और राम मंदिर के खिलाफ थे।

पक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर के सांसदों द्वारा सदन में भारी शोर और नारेबाजी को देखते हुए, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस स्थगन से पहले, सदन में एक गंभीर बहस की उम्मीद थी, लेकिन यह जल्द ही हंगामे में बदल गई, जिससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा बाधित हुई। राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा, जो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इस हंगामे की वजह बना। विपक्ष चाहता था कि सरकार इस मामले पर स्पष्टीकरण दे, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के पूर्व के बयानों को मुद्दा बनाकर पलटवार किया। इस टकराव ने संसदीय कार्यवाही को रोक दिया और भविष्य में इस मुद्दे पर आगे की चर्चा की संभावनाओं पर सवाल खड़े कर दिए। यह घटना संसद में राजनीतिक मतभेदों और मुद्दों को उठाने के तरीकों पर प्रकाश डालती है।