ED ने बिटकॉइन धोखाधड़ी मामले में हेमंत ईश्वर शर्मा की 8.54 करोड़ की संपत्ति जब्त की

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिटकॉइन इन्वेस्टमेंट कंपनी के मालिक हेमंत ईश्वर शर्मा के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी 8.54 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है। शर्मा पर आरोप है कि उसने 2014 से 2018 के बीच करीब 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। ईडी ने सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि देहरादून सब-जोनल ऑफिस ने पीएमएलए, 2002 के तहत 31 जुलाई को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर शर्मा की संपत्ति जब्त की है।

हेमंत ईश्वर शर्मा पर आरोप है कि उसने भोले-भाले लोगों को अपनी आइसलैंड में रजिस्टर्ड वेबसाइट बीटीसीफंडडॉटइज (BTCFund.is) पर बिटकॉइन में निवेश करने का लालच देकर ठगा। ईडी ने यह जांच देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर बीटीसीफंड.इज वेबसाइट के जरिए निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले में दर्ज की गई थी। इसके अलावा, इसी धोखाधड़ी वाली स्कीम के सिलसिले में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर पुलिस स्टेशन में भी शर्मा और अन्य लोगों के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी।
ईडी के अनुसार, जांच में पता चला है कि शर्मा, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है, ने अपनी कंट्रोल वाली वेबसाइट बीटीसीफंड.इज के जरिए बिटकॉइन में निवेश के बहाने लोगों से बड़ी रकम धोखाधड़ी से इकट्ठा की थी। उसने निवेशकों को ज्यादा रिटर्न का वादा करके लुभाया और झूठा दावा किया कि कई विदेशी नागरिक कंपनी से जुड़े हैं, जिससे यह स्कीम भरोसेमंद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित लगे। इन झूठे दावों के कारण पूरे भारत से निवेशकों को प्लेटफॉर्म पर पैसे जमा करने के लिए उकसाया गया।

ईडी ने बताया कि शर्मा ने यह धोखाधड़ी वाली स्कीम करीब 5 साल (2014 से 2018) तक चलाई। जब वह लोगों का भरोसा जीतने और वेबसाइट के जरिए काफी मात्रा में बिटकॉइन इकट्ठा करने में कामयाब हो गया, तो उसने अचानक वेबसाइट बंद कर दी। इससे निवेशक बेबस, ठगा हुआ और धोखा खाया हुआ महसूस करने लगे।

ब्लॉकचेन एनालिसिस से पता चला है कि इस धोखाधड़ी से करीब 856.23 बीटीसी (लगभग 200 करोड़ रुपये) की रकम कमाई गई थी। इस रकम का इस्तेमाल क्रिप्टो एक्सचेंज के जरिए रियल एस्टेट और गाड़ियां खरीदने तथा अपने घर के रेनोवेशन में किया गया था। ईडी ने यह भी बताया कि जांच से पता चला है कि शर्मा के पास बीटीसीफंडडॉटइज से मिले फंड के अलावा आय का कोई और जरिया नहीं था, जिसका इस्तेमाल उसने शानदार जीवनशैली जीने के लिए किया।

अपनी कोई औपचारिक आय न होने के बावजूद, शर्मा दो लग्जरी कारें, देहरादून की एक पॉश लोकेशन पर एक बंगला और देहरादून व आसपास के इलाकों में करोड़ों रुपये की कई अचल संपत्तियां खरीदने और उन्हें बनाए रखने में कामयाब रहा। इससे पहले भी ईडी ने शर्मा की 4.56 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था।

ईडी ने शर्मा को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल देहरादून की सिद्दोवाला जेल में बंद हैं। ईडी ने 20 मई को देहरादून की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने 13 जुलाई को संज्ञान लिया। यह मामला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो ऑनलाइन निवेश के नाम पर जल्दी अमीर बनने के चक्कर में पड़ते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। ईडी की यह कार्रवाई ऐसे धोखेबाजों पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह पूरा मामला एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने लोगों के भरोसे का फायदा उठाया और उन्हें ठगा। बिटकॉइन जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल करके उसने लोगों को आकर्षित किया और फिर रातोंरात गायब हो गया। ईडी की यह कार्रवाई उन सभी निवेशकों के लिए राहत की खबर है जिन्होंने अपना पैसा गंवाया था। यह दिखाता है कि कानून ऐसे धोखेबाजों को बख्शने वाला नहीं है।

हेमंत ईश्वर शर्मा ने अपनी वेबसाइट बीटीसीफंडडॉटइज को एक आकर्षक मंच के रूप में प्रस्तुत किया था। उसने विदेशी निवेशकों और उच्च रिटर्न का झूठा वादा करके लोगों को फंसाया। यह एक क्लासिक पोंजी स्कीम का उदाहरण है, जहां पुराने निवेशकों को नए निवेशकों के पैसे से भुगतान किया जाता है, जब तक कि स्कीम ढह न जाए।

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि शर्मा ने न केवल पैसे ठगे, बल्कि उस पैसे का इस्तेमाल अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए किया। लग्जरी कारें, आलीशान बंगला और अन्य संपत्तियां खरीदना, यह सब उस धोखे का नतीजा था जो उसने भोले-भाले निवेशकों के साथ किया।

यह मामला हमें सिखाता है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी तरह से जांच-पड़ताल करना बहुत जरूरी है। किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह से जानकारी हासिल करनी चाहिए और किसी भी ऐसे वादे पर भरोसा नहीं करना चाहिए जो बहुत ज्यादा आकर्षक लगे। अक्सर, जो चीजें बहुत अच्छी लगती हैं, वे सच नहीं होतीं।

ईडी की यह कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए सक्रिय हैं। ब्लॉकचेन एनालिसिस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके, ईडी ऐसे मामलों में भी अपराधियों का पता लगाने और उनकी संपत्ति जब्त करने में सक्षम है।

यह घटना उन लोगों के लिए एक सबक है जो जल्दी अमीर बनने के सपने देखते हैं और बिना सोचे-समझे किसी भी स्कीम में पैसा लगा देते हैं। हेमंत ईश्वर शर्मा जैसे लोग हमेशा ऐसे अवसरों की तलाश में रहते हैं जहां वे दूसरों की मेहनत की कमाई को हड़प सकें। इसलिए, सतर्क रहना और अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।