अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर ने जैव विविधता संरक्षण पर दिया जोर, नई प्रजातियों की खोज पर प्रसन्नता व्यक्त की
अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर ने जैव विविधता संरक्षण पर दिया जोर, नई प्रजातियों की खोज पर प्रसन्नता व्यक्त की
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ईटानगर, 23 अगस्त (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने विकास कार्यों के साथ-साथ राज्य की अनमोल पेड़-पौधों की विविधता को बचाने के प्रयासों को और मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने रविवार को बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई) के डायरेक्टर कनाद दास से मुलाकात के दौरान यह बात कही। राज्यपाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश 5,000 से अधिक फूलों वाले पौधों और लगभग 600 ऑर्किड प्रजातियों का घर है, जिसमें रोडोडेंड्रोन की 75 से अधिक प्रजातियां और सैकड़ों औषधीय पौधे शामिल हैं। उन्होंने दुर्लभ, लुप्तप्राय और खतरे में पड़ी (आरईटी) प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक विशेष कार्यक्रम की वकालत की, जिसमें जीआईएस मैपिंग, आबादी की निगरानी, सीड बैंकिंग और प्राकृतिक आवास को बहाल करना शामिल हो।
राज्यपाल परनाइक ने इस बात पर बल दिया कि अरुणाचल प्रदेश में विकास के साथ-साथ इन अनमोल प्राकृतिक संपदाओं को बचाना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध जैव विविधता, विशेष रूप से इसकी वनस्पति विविधता, को बनाए रखने के लिए चल रहे संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश में लगातार नई वनस्पतियों और जीवों की खोज हो रही है, जो इसे दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता केंद्रों में से एक बनाता है।बीएसआई डायरेक्टर कनाद दास के साथ हुई बातचीत में, राज्यपाल ने दुर्लभ, लुप्तप्राय और खतरे में पड़ी (आरईटी) प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक खास प्रोग्राम की वकालत की। इस प्रोग्राम में वन विभाग और स्थानीय समुदायों के सहयोग से जीआईएस मैपिंग, आबादी की निगरानी, सीड बैंकिंग और प्राकृतिक आवास को बहाल करने जैसे काम शामिल होंगे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, विशेष रूप से इसकी उल्लेखनीय वनस्पति विविधता, चल रही संरक्षण पहलों और राज्य में वनस्पति संरक्षण को मजबूत करने के लिए भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की।
राज्यपाल परनाइक ने वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थायी आजीविका, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य की असाधारण वनस्पति संपदा की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य के दूरस्थ और कम खोजे गए क्षेत्रों में व्यापक वनस्पति सर्वेक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया, खासकर उन इलाकों में जहां सड़क संपर्क की कमी के कारण अतीत में पहुंचना मुश्किल रहा है। उन्होंने व्यवस्थित प्रलेखन और अनुसंधान करने के लिए अधिक वैज्ञानिक कर्मियों की तैनाती का सुझाव दिया।
राज्यपाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की वनस्पति बहुत खास है। यहां 5,000 से ज्यादा तरह के फूलों वाले पौधे हैं। साथ ही, लगभग 600 तरह के ऑर्किड भी पाए जाते हैं। रोडोडेंड्रोन की 75 से ज्यादा किस्में और सैकड़ों औषधीय पौधे भी यहीं मिलते हैं। यह सब राज्य की अनमोल प्राकृतिक धरोहर है।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्य तो ज़रूरी हैं, लेकिन हमें इन पौधों को बचाना भी होगा। राज्यपाल ने कहा कि हमें एक खास योजना बनानी चाहिए ताकि दुर्लभ और खतरे में पड़े पौधों को बचाया जा सके। इस योजना में जीआईएस मैपिंग (भौगोलिक जानकारी प्रणाली का उपयोग करके नक्शे बनाना), पौधों की गिनती करना, बीज बैंक बनाना और उनके प्राकृतिक घरों को ठीक करना शामिल होना चाहिए। यह सब वन विभाग और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर किया जाएगा।
राज्यपाल ने इस बात की भी सराहना की कि अरुणाचल प्रदेश में आए दिन नई तरह की वनस्पतियां और जीव खोजे जा रहे हैं। यह दिखाता है कि यह जगह जैव विविधता के मामले में कितनी समृद्ध है। उन्होंने कहा कि हमें वैज्ञानिक तरीके से रिसर्च करनी चाहिए, लोगों की आजीविका को सुरक्षित रखना चाहिए, समुदायों को साथ लाना चाहिए और लंबे समय तक पर्यावरण को सुरक्षित रखना चाहिए।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राज्य के दूरदराज के इलाकों में, जहां पहुंचना मुश्किल है, वहां भी वनस्पति का सर्वे होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस काम के लिए और ज्यादा वैज्ञानिकों को भेजा जाना चाहिए ताकि सब कुछ ठीक से दर्ज किया जा सके और रिसर्च हो सके।