जम्मू-कश्मीर में फूलों की खेती: किसानों को स्वरोजगार और आय बढ़ाने का नया जरिया

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Navbharat Times
जम्मू-कश्मीर में कृषि विभाग किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। डडुरा और भगथा गांवों में किसानों से बातचीत से पता चला कि कैसे हाइब्रिड फूलों की खेती, सरकारी सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से उनकी आय में वृद्धि हुई है। 80 वर्षीय किसान प्रेमू, जिन्होंने हाइब्रिड फूलों की खेती से अच्छी कमाई की है, इस पहल का एक प्रमुख उदाहरण हैं, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं।

भगथा गांव के 80 वर्षीय किसान प्रेमू, हाइब्रिड फूलों की खेती में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं और अपनी उपज से अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। उनकी उम्र के इस पड़ाव पर भी खेती के प्रति उनका उत्साह दूसरे किसानों के लिए एक मिसाल है। फूलों की खेती ने न केवल प्रेमू को आय का एक अतिरिक्त जरिया दिया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं। प्रेमू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों को कई तरह की सुविधाएं और मदद दे रही है। उन्होंने बताया कि समय पर मिलने वाला मार्गदर्शन, अच्छी गुणवत्ता वाली कृषि सामग्री और सरकारी योजनाएं किसानों को खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने में मदद कर रही हैं। प्रेमू ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, "फूलों का काम करने से आज हमें पहले से ज् यादा फायदा हो रहा है। Government ने भी मदद की है। हमें बहुत फायदा हुआ है। हमारे काम से हमें काफी लाभ मिला है। उन्होंने हमें पेंशन भी दी है—हर तीन महीने में मिलने वाले 2,000 रुपए भी मिलते हैं, इसलिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद। ऐसे कामों को बढ़ावा देने के लिए मैं Government का शुक्रिया अदा करता हूं। उन्हें भविष्य में भी ऐसे काम करते रहना चाहिए।"
डडुरा गांव के किसान राशिद लगभग 3 कनाल (एक कनाल लगभग 5445 वर्ग फुट होता है) जमीन पर फूलों की खेती कर रहे हैं। कृषि विभाग ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राशिद को आईआईआईएम जम्मू के माध्यम से पौधे लगाने के लिए सामग्री (प्लांटिंग मटीरियल) उपलब्ध कराई थी। यह सहायता किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे प्राप्त करने में मदद कर रही है। राशिद ने बताया कि हाइब्रिड और अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे लगाने से उनकी आमदनी बढ़ी है। उन्होंने सब्जी की खेती के साथ-साथ डेयरी फार्म भी खोला है। राशिद ने सभी से इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आग्रह किया, क्योंकि इससे घर बैठे अच्छी आमदनी हो सकती है।

भगथा गांव के एक और किसान, गुलसार भी फूलों की खेती में सफलतापूर्वक लगे हुए हैं और इस व्यवसाय से अच्छी कमाई कर रहे हैं। किसानों ने समय पर मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और लगातार तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। ये पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फूलों की खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) का मतलब है कि किसान एक ही समय में खेती के साथ-साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, मछली पालन जैसे कई काम करते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है और जोखिम कम होता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आय और स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

80 साल की उम्र में किसान प्रेमू की फूलों की खेती में सफलता यह साबित करती है कि उम्र नवाचार, आय और आत्मनिर्भरता में कोई बाधा नहीं है। पंथल ब्लॉक के एआईए (कृषि विस्तार अधिकारी) राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि ये किसान बहुत मेहनती हैं। उन्होंने आईएफएस (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) के तहत यह सोचा कि अगर ये किसान फूलों की खेती के साथ-साथ पोल्ट्री और डेयरी का काम भी करें, तो अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसी सोच के तहत, उन्होंने आईआईआईएम के साथ मिलकर किसानों के लिए मुफ्त और हाइब्रिड बीज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। यह सुविधा भगथा, पंथल ब्लॉक या दादुरा के किसानों के लिए थी। इस पहल के तहत लगभग 600 कनाल जमीन को कवर किया गया है।

राकेश कुमार शर्मा ने आगे कहा कि उनकी सोच यह है कि अगर हमारे युवा खाली बैठे हैं, तो ये किसान एक मिसाल हैं। वे दिखा रहे हैं कि कैसे दो-तीन कनाल जमीन से भी एक लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं, जैसे एचएडीपी योजना, जेकेसीआईपी योजना या मिशन युवा। ये योजनाएं युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सीखने का अवसर देने के लिए हैं। राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि अगर मैं स्किल (हुनर) और विल (इच्छाशक्ति) की बात करूं, तो आज ये दोनों चीजें इन किसानों में मौजूद हैं।

कृषि विभाग की यह पहल किसानों को नई दिशा दिखा रही है। फूलों की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही है। हाइब्रिड किस्मों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके, किसान अपनी उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार कर रहे हैं। सरकारी सहायता और मार्गदर्शन किसानों के लिए एक मजबूत सहारा साबित हो रहा है, जिससे वे अपनी खेती को एक सफल व्यवसाय में बदल पा रहे हैं। यह दिखाता है कि सही योजना और समर्थन के साथ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है और युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित किया जा सकता है। प्रेमू जैसे किसान इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि मेहनत और सही दिशा-निर्देश से कोई भी उम्र में सफलता हासिल कर सकता है। यह पहल जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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