बांग्लादेश में गैस संकट: फैक्ट्रियों का उत्पादन घटा, श्रमिकों की छंटनी
बांग्लादेश में गैस संकट: फैक्ट्रियों का उत्पादन घटा, श्रमिकों की छंटनी
NewsPoint•
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में 21 जुलाई से शुरू हुआ गैस संकट अब देश के औद्योगिक क्षेत्रों पर भारी पड़ रहा है। गैस की भारी कमी के कारण कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है, कुछ तो बंद हो गई हैं और हजारों श्रमिकों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है। यह गंभीर स्थिति बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट में सामने आई है। एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में गैस भंडार खत्म होने के बाद बुधवार को उसके बंद होने से यह संकट और गहरा गया है। राष्ट्रीय ग्रिड से मिलने वाली ज्यादातर गैस बिजली संयंत्रों को दी जा रही है, जिससे उद्योगों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है। इस समस्या का सबसे ज्यादा असर कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, इस्पात, कांच, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य गैस पर निर्भर उद्योगों पर पड़ा है। गैस से चलने वाले बॉयलर और कैप्टिव पावर प्लांट (फैक्ट्री के अंदर बिजली बनाने वाले प्लांट) चलाने वाली फैक्ट्रियों को अब महंगे ईंधन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
नरसिंदी जिले में गैस का दबाव लगभग शून्य हो गया है। इसके चलते पिछले दो दिनों में 100 से ज्यादा टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। उद्योगपतियों का कहना है कि पहले जहां गैस का दबाव सामान्य 15 पीएसआई (पाउंड प्रति वर्ग इंच) था, वह घटकर 2-4 पीएसआई रह गया था और अब तो लगभग शून्य हो गया है। नरसिंदी जिला बांग्लादेश के करीब 70 प्रतिशत कपड़ों की आपूर्ति करता है। गाजीपुर, नारायणगंज और सावर के गारमेंट उद्योग भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। उत्पादन जारी रखने के लिए कई फैक्ट्रियां कर्मचारियों से अलग-अलग शिफ्ट में काम करवा रही हैं, जिससे उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक की कमी आई है। जो जनरेटर पहले गैस से चलते थे, अब उन्हें फ्यूल ऑयल से चलाया जा रहा है। इससे फैक्ट्रियों का परिचालन खर्च (कामकाज का खर्चा) लगभग पांच गुना बढ़ गया है।मयमनसिंह के भालुका औद्योगिक क्षेत्र में 20 फैक्ट्रियों के कर्मचारियों को आंशिक रूप से छुट्टी पर भेज दिया गया है। इस इलाके की 293 फैक्ट्रियों में से 99 फैक्ट्रियां गैस पर निर्भर हैं और लगभग सभी गैस संकट से जूझ रही हैं। टिटास गैस के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, इलाके की गैस लाइनों का दबाव 140 और 50 पीएसआई से घटकर 30-50 पीएसआई रह गया है। गैस संकट के कारण फैक्ट्रियों को उत्पादन कम होने या बंद रहने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन देना पड़ रहा है। इसके अलावा, निर्यात के सामान की आपूर्ति में देरी होने से समय पर शिपमेंट (सामान भेजना) प्रभावित हो रहा है और महंगे हवाई माल ढुलाई का जोखिम भी बढ़ गया है।
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोर्शेद सरवर सोहेल ने इस बारे में चिंता जताते हुए कहा, "यह संकट केवल फैक्ट्री मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिकों और देश की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल रहा है।" रिपोर्ट के अनुसार, चट्टोग्राम एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन, कर्णफुली ईपीजेड, बायेजिद और कालुरघाट औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियां भी बहुत कम गैस दबाव के कारण अपनी पूरी क्षमता से काफी कम उत्पादन कर पा रही हैं।
यह गैस संकट बांग्लादेश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। उद्योगों को चलाने के लिए गैस एक महत्वपूर्ण ईंधन है। जब गैस की आपूर्ति कम हो जाती है, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। फैक्ट्रियों को या तो उत्पादन कम करना पड़ता है या फिर उन्हें बंद करना पड़ता है। इससे न केवल फैक्ट्रियों को नुकसान होता है, बल्कि हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर भी संकट आ जाता है। इस स्थिति में, फैक्ट्रियों को वैकल्पिक और महंगे ईंधन का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है। यह लागत अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकती है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्यात पर निर्भर करती है, खासकर कपड़ा और गारमेंट उद्योग से। जब उत्पादन प्रभावित होता है और निर्यात में देरी होती है, तो देश की कमाई पर भी असर पड़ता है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने और उद्योगों को राहत देने के लिए कदम उठाने होंगे। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि श्रमिकों को इस मुश्किल घड़ी में कोई परेशानी न हो।