एक राष्ट्र, एक चुनाव: छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ, पीपी चौधरी का दावा

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के चेयरमैन पीपी चौधरी ने दावा किया है कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश के छात्रों को होगा। नई दिल्ली में आईएएनएस से खास बातचीत में चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में युवा और छात्र अहम भूमिका निभाएंगे, और एक साथ चुनाव कराने से शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी कम होगी, जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि समिति ने पूर्व न्यायाधीशों, कानूनी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों सहित विभिन्न हितधारकों से विस्तृत चर्चा की है और जमीनी हकीकत को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला है कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए। चौधरी ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस देशप्रेम के बजाय मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती है, जबकि भाजपा के लिए देश सर्वोपरि है। उन्होंने राहुल गांधी के संसद बहिष्कार पर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष के नेता को संसद में सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिए, न कि सड़कों पर।

पीपी चौधरी ने ‘विकसित भारत’ के निर्माण में युवाओं और छात्रों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को विकसित बनाने का जो सपना देखा है, उसे पूरा करने में युवा और छात्र सबसे आगे रहेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के चार मुख्य स्तंभ हैं - युवा, महिलाएं, अनुसूचित जाति और किसान। इन सभी वर्गों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की दिशा में समिति की चल रही बैठकों के बारे में बताते हुए चौधरी ने कहा कि समिति ने दिल्ली में विभिन्न हितधारकों से मुलाकात की है। उन्होंने भारत के छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों से बातचीत की, जिनसे कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों से भी चर्चा की गई। कुल मिलाकर, समिति ने लगभग 12 न्यायाधीशों से राय ली है।
कानूनी विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चा का जिक्र करते हुए पीपी चौधरी ने बताया कि समिति ने हरीश साल्वे, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों से भी बातचीत की है। साथ ही, अर्थशास्त्रियों से भी विचार-विमर्श किया गया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों और अन्य जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से भी राय ली गई है। इन सभी चर्चाओं के आधार पर, चौधरी ने कहा कि जमीनी हकीकत यही है कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए।

समिति के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पीपी चौधरी ने कहा कि समिति का मुख्य काम यह विचार करना है कि प्रस्तावित विधेयक में क्या सुझाव दिए जाएं, क्या बदलाव किए जाएं और किन महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल किया जाए। इसका लक्ष्य एक ऐसा कानून बनाना है, जिसके तहत देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। उन्होंने बताया कि इससे सरकार में स्थिरता आएगी, लोगों को बेहतर शासन मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान होगा। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के साथ-साथ एक समान मतदाता सूची की आवश्यकता पर भी बल दिया।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का सबसे बड़ा लाभ छात्रों को कैसे मिलेगा, इस पर पीपी चौधरी ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होने से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की अक्सर चुनावी ड्यूटी लगाई जाती है, जिससे कई बार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक साथ चुनाव होने से शिक्षकों की बार-बार चुनावी ड्यूटी लगने की समस्या कम हो सकती है, और इसका सीधा लाभ छात्रों की पढ़ाई को मिलेगा। यह एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे तौर पर आम आदमी और छात्रों के जीवन से जुड़ा है।

2029 के लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर पीपी चौधरी ने कहा कि यह एक राजनीतिक कदम है और एक राजनीतिक फैसला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। उन्होंने अनुच्छेद 174(2) का हवाला देते हुए कहा कि अगर मंत्रिपरिषद चाहे, तो वह अपनी विधानसभा को भंग कर सकती है और लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव करा सकती है। इसलिए, यह समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने कहा कि चाहे एनडीए हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य पार्टी, अगर वे 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराना चाहते हैं, तो ऐसा किया जा सकता है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। यह दर्शाता है कि राजनीतिक दल अपनी सुविधा और देशहित के अनुसार ऐसे निर्णय ले सकते हैं।

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पर तंज कसते हुए पीपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसा व्यवहार किया है, जैसे उसे कानून का पालन नहीं करना है, क्योंकि वह खुद को कानून से ऊपर मानती है। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून सभी पर लागू होते हैं, और कांग्रेस भी इससे अलग नहीं है। चौधरी ने कहा कि वंदे मातरम एक राष्ट्रीय गीत है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों को एकजुट करने तथा उनमें प्रेरणा पैदा करने का काम किया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम से लोगों को प्रेरणा मिलती थी और आजादी की लड़ाई में अनेक लोगों ने बलिदान दिया। कांग्रेस पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए आजादी के 80 साल बाद भी गीत के दो पद गाने पर अड़ी है। यह दिखाता है कि कांग्रेस में देशप्रेम नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए देश सबसे पहले है, जबकि कांग्रेस के लिए देश नहीं, परिवार पहले है। यह बयान कांग्रेस की राष्ट्रवाद की भावना पर सवाल उठाता है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि विपक्ष के नेता की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। आम जनता को उन पर भरोसा है कि वे देश की आवाज उठाएंगे और सरकार को जवाबदेह ठहराएंगे। लेकिन, सरकार को जवाबदेह ठहराने और संसद में मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय, वे संसद का बहिष्कार कर रहे हैं और संसद के बजाय सड़कों पर मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर होता अगर राहुल गांधी संसद में मामलों पर चर्चा करते और सरकार को जवाबदेह ठहराते। पीपी चौधरी ने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में कांग्रेस और राहुल गांधी को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह बयान विपक्ष की भूमिका और संसद की गरिमा पर प्रकाश डालता है।

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