सावन का अंतिम सोमवार: देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब, 3 लाख से अधिक कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक
सावन का अंतिम सोमवार: देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब, 3 लाख से अधिक कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक
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देवघर, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सावन के आखिरी सोमवार पर बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा है। 105 किलोमीटर लंबा कावंरिया पथ श्रद्धालुओं से भर गया है। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर है। रविवार की रात से ही कांवड़ियों का आना शुरू हो गया था। सोमवार की सुबह तक जल चढ़ाने के लिए चार किलोमीटर से लंबी कतार लग गई थी। अब तक 55 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं और आज तीन लाख से अधिक के जल चढ़ाने की उम्मीद है।
सुबह 4.13 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पुरोहितों ने विशेष 'सरदारी पूजा' (सरकारी पूजा) की। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोल दिया गया। भीड़ को संभालने के लिए 'बाह्य अरघा प्रणाली' का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आए कांवड़िए इसी अरघा में जल चढ़ा रहे हैं, जो सीधे बाबा ज्योतिर्लिंग पर गिर रहा है। अंतिम सोमवार पर बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के मंदिरों के शिखरों के बीच लाल धागा बांधने का भी खास उत्साह है।देवघर जिला प्रशासन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूरी तरह तैयार है। सुरक्षा के लिए 26 क्विक रिस्पांस टीमों के अलावा क्यू कॉम्प्लेक्स और फुटओवरब्रिज पर एक नई विशेष क्यूआरटी तैनात की गई है। इससे कतारें बिना रुके चलती रहेंगी। भक्तों को गर्मी से राहत देने के लिए पीने के साफ पानी और पानी के छिड़काव की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ के कारण दोपहर में मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे। जलार्पण रात आठ से नौ बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ का विशेष श्रृंगार पूजन शुरू होगा।
परंपरा के अनुसार, इस श्रृंगार के लिए देवघर जेल के कैदियों द्वारा तैयार किया गया फूलों का मुकुट बाबा को पहनाया जाएगा। महाआरती के बाद रात नौ से साढ़े नौ बजे के बीच श्रद्धालु बाबा के इस दिव्य रूप के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद शयन आरती के साथ मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे।
सावन के इस आखिरी सोमवार पर देवघर में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारे हवा में गूंज रहे हैं। 105 किलोमीटर लंबा कावंरिया पथ, जो सुल्तानगंज से शुरू होता है, पूरी तरह से शिवभक्तों से भर गया है। यह नजारा बताता है कि आस्था और भक्ति की शक्ति कितनी बड़ी होती है। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 अपने अंतिम चरण में है और इसका समापन भी भव्य होगा।
रविवार की आधी रात से ही कांवड़ियों का रेला देवघर पहुंचने लगा था। सोमवार की सुबह तक तो आलम यह था कि जल चढ़ाने के लिए लगी कतार चार किलोमीटर से भी लंबी हो गई थी और कुमैठा तक पहुंच गई थी। यह दिखाता है कि लोग बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए कितनी दूर-दूर से आए हैं और कितनी देर तक इंतजार करने को तैयार हैं। सावन के पूरे महीने में अब तक 55 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। आज, यानी आखिरी सोमवार को, तीन लाख से अधिक कांवड़ियों के जल चढ़ाने की उम्मीद है।
मंदिर की एक खास परंपरा है। सुबह 4.13 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पुरोहितों ने मंत्रोच्चार और वैदिक ऋचाओं के बीच खास 'सरदारी पूजा' की। इसे सरकारी पूजा भी कहते हैं। इसके तुरंत बाद आम भक्तों के लिए मंदिर खोल दिया गया। गर्भगृह में बहुत भीड़ हो जाती है, इसलिए भीड़ को नियंत्रित करने और हर भक्त का जलार्पण सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए 'बाह्य अरघा प्रणाली' का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह प्रणाली क्या है? सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करके जो कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेकर आते हैं, वे इस अरघा के पात्र में अपना जल चढ़ाते हैं। यह जल सीधे बाबा ज्योतिर्लिंग पर गिरता है। इस तरह, हर भक्त का जल बाबा तक पहुंचता है। इसके अलावा, अंतिम सोमवार पर बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के मंदिरों के शिखरों के बीच एक पवित्र लाल धागा बांधने की भी परंपरा है। इसे लेकर भी श्रद्धालुओं में बहुत उत्साह है।
देवघर जिला प्रशासन इस भारी भीड़ को देखते हुए पूरी तरह से मुस्तैद है। कड़ी धूप और उमस के बावजूद, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। पहले से तैनात 26 क्विक रिस्पांस टीमों के अलावा, क्यू कॉम्प्लेक्स और फुटओवरब्रिज पर एक नई विशेष क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) तैनात की गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कतारें बिना किसी रुकावट के लगातार चलती रहें।
कतार में लगे भक्तों को गर्मी और थकान से राहत देने के लिए पीने के साफ पानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही, 'वाटर स्प्रिंकलिंग' यानी पानी के छिड़काव की भी खास व्यवस्था है, जिससे वातावरण थोड़ा ठंडा रहे। श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ को देखते हुए, मंदिर के कपाट दोपहर में बंद नहीं किए जाएंगे। जलार्पण का काम अनवरत जारी रहेगा। शाम को मंदिर के कपाट रात आठ से नौ बजे के बीच जलार्पण रोकने के बाद बंद होंगे।
इसके बाद बाबा बैद्यनाथ का अलौकिक और दिव्य श्रृंगार पूजन शुरू होगा। यह श्रृंगार बहुत खास होता है। परंपरा के अनुसार, इस विशेष श्रृंगार के लिए देवघर जेल के कैदियों द्वारा बहुत श्रद्धा से फूलों का मुकुट तैयार किया जाता है, जिसे बाबा को पहनाया जाएगा। महाआरती के बाद, रात नौ से साढ़े नौ बजे के बीच श्रद्धालु बाबा के इस दिव्य श्रृंगार रूप के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद शयन आरती होगी और फिर मंदिर के कपाट विश्राम के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह पूरा आयोजन आस्था, भक्ति और व्यवस्था का एक अद्भुत संगम है।