ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: एक्सपर्ट्स का दावा, पहले से बेहतर स्थिति में

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के फिर से भड़कने के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है। यह बात विशेषज्ञों ने सोमवार को कही। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने 11 जुलाई को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने की घोषणा की थी। ईरान के इस ऐलान के बाद रविवार को होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।

एक रिफाइनरी से जुड़े अधिकारी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सितंबर और अक्टूबर के लिए उत्पादन लागत बढ़ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बार भारत की स्थिति पहले से काफी मजबूत है। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश ने अगस्त तक के कच्चे तेल और एलपीजी के आयात को सुरक्षित कर लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि एनएनजी (प्राकृतिक गैस) के मामले में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन वे इतनी बड़ी नहीं हैं कि उन्हें संभाला न जा सके।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम भी 5 प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से जोखिम बढ़ गया है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। लेकिन इस बार आपूर्ति को लेकर चिंताएं थोड़ी कम हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ओपेक (तेल निर्यातक देशों का संगठन) के अलावा अन्य देश अपना उत्पादन बढ़ा चुके हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारत के पास 60 दिनों के लिए कच्चा तेल, 60 दिनों के लिए एनएनजी और 45 दिनों के लिए एलपीजी का स्टॉक जमा है। यह स्टॉक देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और शांति वार्ता शुरू होने के बाद, भारत ने औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगी पाबंदियों में भी ढील दी थी। इसका मतलब है कि उद्योगों को अब इन महत्वपूर्ण ईंधनों की आपूर्ति आसानी से मिल सकेगी, जिससे उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि स्वाभाविक है। होर्मुज स्ट्रेट एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का व्यापार होता है। जब यह मार्ग बंद होता है, तो तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ जाता है, जिससे कीमतें ऊपर चली जाती हैं। लेकिन भारत ने पहले से ही अपनी भंडारण क्षमता को बढ़ाकर इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर ली है।

एनएनजी, यानी प्राकृतिक गैस, का उपयोग बिजली उत्पादन और उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इसके आयात में थोड़ी दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि ये दिक्कतें प्रबंधनीय हैं। इसका मतलब है कि सरकार इन दिक्कतों को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। कच्चे तेल और एलपीजी के आयात को सुरक्षित करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती रहें, भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी स्थिति उत्पन्न हो।

कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत स्थिति में है। सरकार की दूरदर्शिता और पहले से की गई तैयारियों के कारण, देश इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

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