राजस्थान में जन्म दर में गिरावट, पर पंजीकरण में वृद्धि: Crs के आंकड़े क्या कहते हैं?
राजस्थान में जन्म दर में गिरावट, पर पंजीकरण में वृद्धि: CRS के आंकड़े क्या कहते हैं?
NewsPoint•
राजस्थान में जन्म दर में गिरावट के बावजूद जन्म पंजीकरण की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के आंकड़ों से सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में जन्म दर 2024 में 23.17 प्रति हजार से घटकर 2025 में 22.56 प्रति हजार हो गई है। इसके विपरीत, 2025 में कुल 19,82,719 जन्म पंजीकृत हुए, जो 2024 के 19,71,615 पंजीकरणों से 11,104 अधिक हैं। यह विसंगति जनसंख्या अनुमान, पंजीकरण व्यवस्था में सुधार और स्वास्थ्य संस्थानों में रिकॉर्डिंग जैसे कई कारणों से हो सकती है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियां गहनता से विश्लेषण कर रही हैं।
यह दिलचस्प स्थिति राजस्थान में जन्म दर और जन्म पंजीकरण के आंकड़ों के बीच एक बड़ा अंतर दिखा रही है। जहाँ एक ओर जन्म लेने वाले बच्चों की दर कम हुई है, वहीं दूसरी ओर जन्म का पंजीकरण कराने वालों की संख्या बढ़ी है। नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में राजस्थान में 19 लाख 82 हजार 719 बच्चों का जन्म पंजीकृत हुआ। यह संख्या पिछले साल, यानी 2024 में पंजीकृत हुए 19 लाख 71 हजार 615 जन्मों से 11 हजार 104 ज्यादा है। यह दिखाता है कि जन्म दर भले ही कम हुई हो, लेकिन जन्मों का रिकॉर्ड पहले से बेहतर तरीके से दर्ज हो रहा है।आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करने पर पता चला है कि यह ट्रेंड पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं है। राजस्थान के कुल 41 जिलों में से 15 जिलों में उम्मीद से ज्यादा जन्मों का पंजीकरण हुआ है। वहीं, बाकी बचे 26 जिलों में अनुमान से कम जन्मों का पंजीकरण दर्ज किया गया है। यह अंतर बताता है कि अलग-अलग जिलों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था और लोगों की जागरूकता का स्तर अलग-अलग हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म दर और जन्म पंजीकरण के आंकड़ों में यह अंतर कई वजहों से हो सकता है। एक मुख्य कारण जनसंख्या का अनुमान लगाने का तरीका हो सकता है। हो सकता है कि पहले जनसंख्या का अनुमान थोड़ा गलत लगाया गया हो। दूसरा, पंजीकरण व्यवस्था में सुधार हुआ है। यानी, अब जन्मों का पंजीकरण पहले से ज्यादा आसानी से और बेहतर तरीके से हो रहा है। दूरदराज के इलाकों में भी अब पंजीकरण की स्थिति सुधर रही है। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म लेने वाले बच्चों के रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से दर्ज किया जा रहा है।
नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) जन्म और मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड रखती है। यह डेटा सरकार के लिए बहुत अहम होता है। इसी डेटा के आधार पर सरकारी योजनाएं बनती हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाता है और जनसंख्या से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां इन आंकड़ों का गहराई से अध्ययन कर रही हैं। उनका मकसद यह समझना है कि जन्म दर में कमी और जन्म पंजीकरण में वृद्धि के बीच यह अंतर क्यों आ रहा है। जिलों के स्तर पर भी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पता चल सके कि कहाँ क्या गड़बड़ है या कहाँ सुधार हुआ है।
जानकारों का कहना है कि जन्म दर में गिरावट समाज और स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक बदलावों का संकेत हो सकती है। जैसे कि परिवार नियोजन के तरीकों का बेहतर इस्तेमाल या स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जिससे कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। वहीं, जन्म पंजीकरण में वृद्धि यह दर्शा सकती है कि सरकारी प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हुई है और लोग अपने बच्चों का पंजीकरण कराने के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। राजस्थान में जन्म से जुड़े इन आंकड़ों ने जनसंख्या और स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा छेड़ दी है। अब सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन जिलों में अनुमान और वास्तविक पंजीकरण के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों रहा, ताकि भविष्य में और बेहतर योजनाएं बनाई जा सकें।