14 जुलाई 2026: भौमवती अमावस्या का शुभ संयोग, जानें पूजा का विशेष मुहूर्त और उपाय
14 जुलाई 2026: भौमवती अमावस्या का शुभ संयोग, जानें पूजा का विशेष मुहूर्त और उपाय
NewsPoint•
नई दिल्ली, 13 जुलाई। 14 जुलाई 2026 को भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन पितरों, हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। यह अमावस्या आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की है और दोपहर 3:13 बजे तक रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा, जबकि चन्द्रोदय सुबह 5:22 बजे और चन्द्रास्त शाम 7:29 बजे होगा।
पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई 2026 को सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा भी इसी नक्षत्र में अगले दिन 12:09 बजे संचार करेगा। इस दिन सुबह 11:56 बजे तक व्याघात योग रहेगा, जिसके बाद अगले दिन सुबह 8:03 बजे तक हर्षण योग प्रभावी रहेगा। मंगलवार को होने के कारण यह अमावस्या और भी खास हो जाती है।इस दिन का सबसे शुभ समय अभिजित मुहूर्त है, जो दोपहर 12:06 से 12:59 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण काम, पूजा या व्यापार बिना किसी चिंता के शुरू किया जा सकता है। यह समय राहुकाल या अन्य अशुभ समय से मुक्त माना जाता है।
हालांकि, कुछ समय ऐसे भी हैं जिनसे बचना चाहिए। राहुकाल दोपहर 3:54 बजे से शाम 5:38 बजे तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 12:27 से 02:10 तक रहेगा, और यमगंड काल सुबह 9:13 से 10:53 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 14 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में रहेंगे, जबकि चंद्रमा कर्क राशि में स्थित होगा। इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के अनुसार, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना बहुत जरूरी हो, तो कुछ खास ज्योतिषीय उपाय करके ही प्रस्थान करना चाहिए।
पंचांग हिंदू काल-गणना की एक महत्वपूर्ण पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। इसका उपयोग शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले किया जाता है। 14 जुलाई 2026 की भौमवती अमावस्या इसी पंचांग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है।