पुलकित मणि की पीएम मोदी की मिमिक्री पर राजनीतिक विवाद, राहुल गांधी के साथ इंदौर में हुआ प्रदर्शन

NewsPoint•
Navbharat Times
इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री कर सबका ध्यान खींचा। यह कार्यक्रम 19 सितंबर को हुआ था। पुलकित ने पीएम मोदी के अंदाज में राहुल गांधी के साथ बातचीत करते हुए करीब एक मिनट का प्रदर्शन दिया। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की एक हालिया रैली में बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने की घटना का भी संदर्भ दिया। पूरा मामला इस वक्त काफी चर्चा में है और राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है।

पुलकित ने अपने प्रदर्शन में पहले मोदी की शैली में राहुल गांधी से गले मिलकर बातचीत की। खास बात यह थी कि राहुल गांधी को पहले से इस एक्ट की जानकारी नहीं थी। पुलकित ने बताया कि कार्यक्रम की टीम उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया देखना चाहती थी, इसलिए उन्हें अचानक मंच पर बुलाया गया। इस दौरान दोनों के बीच दिलचस्प बातचीत हुई और यह मिमिक्री दर्शकों को बहुत पसंद आई।
पुलकित की प्रस्तुति में एक विशेष हिस्सा रहा जब उन्होंने पीएम मोदी की रैली में बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने की घटना को दोहराया। उन्होंने दर्शकों की ओर इशारा करते हुए कहा, “मां को कुर्सी दो, मां।” यह संवाद बहुत मजेदार था और दर्शकों ने इसे काफी सराहा। हालांकि, इसी एक्ट पर राजनीति में विवाद उठ गया। भाजपा नेताओं ने इस प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई और इसे पीएम मोदी तथा बुजुर्ग महिला का अपमान बताया।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इस प्रस्तुति को व्यंग्य और मिमिक्री के रूप में देखा। भाजपा का कहना था कि यह प्रस्तुति गंभीर विषय को मज़ाक में बदल देती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के नेता इसे मनोरंजन के लिए सही मानते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राजनीति में मिमिक्री को कैसे अलग-अलग तरह से देखा जा सकता है।

पुलकित ने अपने प्रदर्शन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी को पहले से जानकारी नहीं थी और कार्यक्रम के दौरान संकेत मिलने पर वे मंच पर आए। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया भी स्वाभाविक थी। उन्होंने कहा कि उनकी मिमिक्री का उद्देश्य कोई बुरा नहीं था, बल्कि सिर्फ मनोरंजन था।

इंदौर के इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कुछ लोग इसे राजनीतिक व्यंग्य मानते हैं, जबकि कुछ इसे भाजपा नेताओं की आलोचना का कारण मानते हैं। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राजनीति कितनी जटिल हो सकती है।

इस प्रकार, पुलकित मणि की मिमिक्री ने केवल हास्य पैदा नहीं किया, बल्कि राजनीति में भी एक नई बहस को जन्म दिया है। सबसे दिलचस्प यह है कि ऐसे प्रदर्शन कैसे सामाजिक और राजनीतिक संवाद को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले पर और क्या प्रतिक्रियाएँ सामने आती हैं।

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