दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के चलते भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के चलते भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
NewsPoint•
दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन और अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को लेकर राजनीति गरमा गई है। पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा कि प्रदर्शनकारी देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, मुंबई में कांग्रेस नेता भाई जगताप और विधायक असलम शेख ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर जोर दिया और बताया कि सख्ती बढ़ती जा रही है।
भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है।” उनके मुताबिक, लोगों को यह समझ में आ गया है कि चुनावों में विपक्ष का वोट प्रतिशत लगातार घट रहा है। इसलिए वे वोट चोरी जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी, कम्युनिस्ट, पाकिस्तान समर्थक और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के लोग एकजुट हो गए हैं। उनका इरादा स्पष्ट है और वे अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए योजना बना रहे हैं।वहीं, मुंबई के कांग्रेस नेता भाई जगताप ने अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे देश में बढ़ती सख्ती का अगला चरण बताया। जगताप ने कहा, “क्या अभिजीत दिपके कोई अपराधी हैं या दाऊद इब्राहिम हैं, जिन्हें विमान से इस तरह हिरासत में ले लिया गया?” उन्होंने यह भी कहा कि दिपके एक युवा नागरिक हैं जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनका मानना है कि देश के युवा उनके साथ खड़े हैं और सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की बात की। उन्होंने कहा, “लोगों को संविधान के तहत विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है।” शेख ने यह सवाल उठाया कि जब लोग अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उनके साथ क्यों मारपीट की जा रही है और होटल बंद क्यों कराए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में आपातकाल जैसे हालात पैदा किए जा रहे हैं। “पुलिस और सेना को बच्चों और युवाओं के खिलाफ तैनात किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
असलम शेख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार ने उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए कानून बनाया। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा कदम क्यों उठाया गया और क्या इसका उद्देश्य जवाबदेही से बचाना था। उनके अनुसार, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है और किसी भी व्यक्ति के गलत काम करने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।”
इन विवादों के बीच, विरोध-प्रदर्शन और गिरफ्तारियों ने देश में एक नए सिरे से राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। यह स्पष्ट है कि लोग अपने अधिकारों और व्यक्तित्व की रक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर आगे कैसे बढ़ते हैं।