राजस्थान में किसानों के लिए 256 सामुदायिक जल स्रोत बनाने की योजना, बागवानी फसलों को मिलेगा लाभ
राजस्थान में किसानों के लिए 256 सामुदायिक जल स्रोत बनाने की योजना, बागवानी फसलों को मिलेगा लाभ
NewsPoint•
राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राज्य में 256 सामुदायिक जल स्रोत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उद्यान आयुक्तालय ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत यह लक्ष्य निर्धारित किया है। इन जल स्रोतों का आकार 100×100×3 मीटर होगा और इन्हें प्लास्टिक फिल्म या प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (RCC) की परत का उपयोग करके बनाया जाएगा। इस योजना का मूल उद्देश्य वर्षा जल और अन्य स्रोतों के पानी को संग्रहीत कर उसको खेती में उपयोग करना है।
राजस्थान के कई क्षेत्रों में पानी की कमी एक बड़ी समस्या है। ऐसी स्थिति में सामुदायिक जल स्रोत किसानों को पानी का उचित प्रबंधन करने में मदद करेंगे। इन जल स्रोतों के माध्यम से कई किसान एक साथ लाभ उठा सकेंगे। यह जल संग्रहण की व्यवस्था बारिश के समय में अधिक प्रभावी होगी जब पानी भरपूर होता है। यहाँ ये जल स्रोत न केवल पानी का भंडारण करेंगे, बल्कि किसानों को सूखे के समय भी पानी उपलब्ध कराएंगे।सामुदायिक जल स्रोत बागवानी फसलों के विकास में मदद करेंगे। फसलें जैसे फल, सब्जियां और अन्य उद्यानिकी उत्पाद इसके तहत शामिल होते हैं। इन फसलों के लिए समय पर सिंचाई करना बहुत जरूरी है। यदि पानी की कमी होती है, तो फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होते हैं। इसीलिए, सामुदायिक जल स्रोतों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधन मिलेंगे।
जल स्रोतों के निर्माण में प्लास्टिक फिल्म या RCC की परत का उपयोग होगा। इनका मुख्य उद्देश्य जल स्रोत की संरचना को मजबूत बनाना और पानी के रिसाव को कम करना है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी मानकों का पालन किया जाए। इससे जल संग्रहण क्षमता और इसके उपयोग की उपयोगिता बनी रहेगी।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए, जल स्रोतों के निर्माण स्थलों का सही चुनाव, किसानों की जरूरतों का आकलन और इन जल स्रोतों की उचित देखभाल सुनिश्चित करना आवश्यक है। यह पूरी योजना राजस्थान में जल प्रबंधन और बागवानी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
हालांकि, किसानों को इस योजना से असली फायदा तब ही होगा, जब निर्माण कार्य पूरा होगा, पानी की उपलब्धता होगी और जल स्रोतों का समुचित रखरखाव होगा। इसके अलावा, योजना के तहत जिलावार आवंटन और निर्माण की समयसीमा की जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।
किसान अगर इन जल स्रोतों से सही तरीके से लाभ उठाते हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ा वरदान साबित हो सकता है। उनके लिए यह जल स्रोत एक साधन बन जाएंगे, जिससे वे पानी का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा लाभ उन क्षेत्रों में होगा, जहां बारिश अनियमित रहती है।
राजस्थान में जल प्रबंधन की इस नई योजना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान अपने खेतों में निश्चित रूप से पानी की उपलब्धता बनाए रखें। सामुदायिक जल स्रोतों का विकास इस दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि बागवानी फसलों को भी मजबूती मिलेगी।