पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी का आरोप: ममता बनर्जी के गुट ने चुराने की कोशिश की महत्वपूर्ण शपथ पत्र
पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी का आरोप: ममता बनर्जी के गुट ने चुराने की कोशिश की महत्वपूर्ण शपथ-पत्र
NewsPoint•
पश्चिम बंगाल में राजनीति का माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सोमवार को ममता बनर्जी के गुट पर गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि ममता का गुट उन महत्वपूर्ण शपथ-पत्रों को चुराने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) में जमा किया जाना है। यह शपथ-पत्र पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ पर अधिकार साबित करने के लिए जरूरी हैं।
ऋतब्रत ने आगे बताया कि 25 अक्टूबर की शाम को कालीघाट से ममता के गुट के हलफनामे एक चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए दिल्ली भेजे गए। जबकि उनके गुट के दस्तावेज सड़क मार्ग से दिल्ली ले जाए जा रहे थे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया बयान में ये भी कहा कि उनके कार्यकर्ता जब इन दस्तावेजों को लेकर चुनाव आयोग में जमा करने के लिए निकले थे, तब एक ट्रक पर कब्जा करने और उनके दस्तावेजों को छीनने की कोशिश की गई। ऋतब्रत ने बयान में कहा, "हमारे कार्यकर्ताओं ने बहादुरी से इसका सामना किया। लड़ाई जारी है। यह ‘चार्टर्ड कल्चर’ और ‘ग्रास रूट’ के संकल्प के बीच की लड़ाई है। तानाशाह हर क्षेत्र में संगठित लूट की अपनी कोशिशों में सफल नहीं होंगे।"
राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इस साल की शुरुआत में ईसीआई ने मूल पार्टी नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और चुनाव चिह्न ‘घास और फूल’ को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया था। ममता के गुट को नया नाम “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” और चुनाव चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी दिया गया, जबकि ऋतब्रत के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न मिला।
अब यह तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है कि किस गुट को मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिलना चाहिए। इस मामले में ईसीआई ने दोनों गुटों से हलफनामे मांगे हैं। इसी बीच, ऋतब्रत द्वारा लगाई गई चोरी की कोशिश के आरोपों ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में काफी हलचल पैदा कर दी है।
इस सारे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों के बीच की तानातनी भी बढ़ी है। जब शपथ-पत्रों की बात आती है, तो यह समझना जरूरी है कि ये दस्तावेज किसी रास्ते के माध्यम से नहीं बल्कि सही तरीके से चुनाव आयोग तक पहुंचने चाहिए। राजनीतिक फाइनल का ये चरण निश्चित तौर पर दोनों गुटों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इस तरह, पश्चिम बंगाल की राजनीति में ये आरोप-प्रत्यारोप एक नई बहस को जन्म दे रहे हैं। यह देखना शेष है कि इस विवाद का अंत कैसे होता है और कौन गुट जीतकर उभरता है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग पर होंगी जो दोनों गुटों के हलफनामों पर निर्णय लेने वाले हैं।