‘चोखा’ है चोखा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
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‘चोखा’ शब्द का प्रयोग उत्तर भारत में कई अर्थों में किया जाता है। आमतौर पर यह आलू, बैंगन या दूसरी सब्जियों को भूनकर तैयार किया गया व्यंजन है, जिसे भर्ता भी बोलते हैं। लिट्टी या बाटी के साथ इसका मेल तो अब सभी की जुबान पर चढ़ चुका है। लेकिन, जिस तरह से चोखा बनाने का ढंग अलग-अलग है, वैसे ही अर्थ भी हैं इसके कई। इसका प्रयोग किसी चीज की खूबी, शुद्धता या अच्छी गुणवत्ता बताने के लिए भी किया जाता है। मसलन, किसी व्यक्ति के व्यवहार को ईमानदार और अच्छा बताते हुए कहा जा सकता है, ‘उनका व्यवहार एकदम चोखा है।’ कोई सौदा अगर अच्छा मिल गया, तो वह ‘चोखा सौदा’ है। कुछ रंग भी चोखा होते हैं और खुद चोखे का स्वाद भी चोखा होता है, अगर मिर्च-तेल वगैरह ठीक अनुपात में मिल गए तो। इस शब्द का एक और अर्थ धारदार या तेज है। चाकू की तेज धार के लिए ‘चोखी धार’ सुनने को मिलता है। गुजराती भाषा में ‘चोखा’ शब्द का अर्थ चावल भी होता है।