बैंक-ग्राहक मिलें तो सुरक्षित होगा डेटा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
bank customer collaboration to strengthen data security importance of cybersecurity in the digital age
भारत में बैंकिंग, बीमा, स्वास्थ्य और ई-कॉमर्स के डिजिटलीकरण से सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन निजी डेटा की सुरक्षा चुनौती भी बढ़ी है। हाल में भारतीय स्टेट बैंक के 3,897 ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल और पते जैसी जानकारियां डार्क वेब पर मिलना इसका उदाहरण है। जुलाई में बैंक ऑफ बड़ौदा के एक कर्मचारी के ईमेल खाते तक अनधिकृत पहुंच का मामला सामने आया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2018 से मार्च 2022 के बीच बैंकों ने डेटा सेंध की 248 घटनाएं दर्ज की थीं।

ट्रेनिंग जरूरी । डेटा सुरक्षा केवल बैंक के सर्वर तक सीमित नहीं है। पेमेंट नेटवर्क, तकनीकी साझेदारों और दूसरी सेवा देने वाली कंपनियों से भी खतरा हो सकता है। इसलिए उनकी सुरक्षा की जांच और नियमित निगरानी जरूरी है। सॉफ्टवेयर अपडेट रखने, मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करने, क्लाउड में रखे डेटा को सुरक्षित रखने और जरूरी जानकारी तक पहुंच सीमित करने से खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए कर्मचारियों को AI से मदद लेने का प्रशिक्षण देना जरूरी है।
लगातार निगरानी । डेटा सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन, एक से ज्यादा तरीकों से पहचान की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी करनी होगी। जरूरत के मुताबिक ही डेटा जुटाया और सुरक्षित रखा जाए। गैर जरूरी जानकारी को तय नियमों के अनुसार हटाया जाए। डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन करने से डिजिटल सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा। डेटा लीक होने पर प्रभावित लोगों को समय पर सूचना और बचाव के उपाय बताने चाहिए।

साझा प्रयास । रिजर्व बैंक, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम (CERT-In), साइबर अपराध समन्वय केंद्र और अन्य नियामक संस्थाएं आपस में तेजी से और सुरक्षित तरीके से जानकारी साझा करें तो साइबर अपराधों पर कार्रवाई संभव है। डार्क वेब पर डेटा मिलने का स्रोत फॉरेंसिक जांच से ही स्पष्ट होगा। यह किसी सेवा प्रदाता, कर्मचारी के उपकरण या पुराने असुरक्षित डेटाबेस से लीक हो सकता है।

ग्राहकों की जिम्मेदारी । ग्राहकों को भी जागरूक रहना होगा। निजी जानकारी की सुरक्षा से धोखाधड़ी का जोखिम घटाया जा सकता है। संदिग्ध संदेशों से मिली APK फाइल डाउनलोड न करें। खाते की नियमित निगरानी करें और संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना दें। संस्थान भी त्वरित जांच, सुरक्षा में सुधार और ग्राहकों को समय पर सहायता देकर उनका भरोसा मजबूत कर सकते हैं।

(लेखक बैंक अधिकारी हैं)