केंद्र सरकार ने निर्यात सुरक्षा के लिए 'रिलीफ योजना' की समयसीमा बढ़ाई, निर्यातकों को मिलेगा 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज

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केंद्र सरकार ने निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। वाणिज्य विभाग ने 'रिलीफ (निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन एवं लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप)' योजना के घटक-II की समयसीमा 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दी है। यह निर्णय सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर इसके प्रभाव के कारण यह विस्तार किया गया है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को ईसीजीसी (भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम) के बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत निर्यातकों को 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज प्रदान किया जा रहा है।

यह योजना 19 मार्च, 2026 को शुरू हुई थी। इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय निर्यातकों की सहायता करना है, जो खाड़ी क्षेत्र में घटनाक्रमों के कारण बढ़ती माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम के कारण परेशान हैं। हाल के समय में होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन और मिसाइल हमलों की रिपोर्ट्स आई हैं, जिससे भारतीय निर्यातक चिंतित हैं। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा हमलों के कारण युद्ध का खतरा भी बढ़ गया है।
'रिलीफ' योजना में बीमा प्रीमियम पर सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इसके तहत, अगर निर्यातक 16 मार्च, 2026 या उसके बाद व्यक्तिगत पॉलिसियों या समग्र कारोबार पॉलिसियों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें बीमा प्रीमियम में होने वाली वृद्धि से संरक्षण मिलेगा। यह योजना पूर्ण कंटेनर लोड (एफसीएल), आंशिक कंटेनर लोड (एलसीएल) और तापमान नियंत्रित कंटेनर के लिए लागू है। हालांकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

बयान के मुताबिक, जो निर्यातक 'रिलीफ' योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें ईसीजीसी के ग्राहक पोर्टल के जरिए दावे और उसके समर्थन दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके लिए यूजर आईडी और पासवर्ड बनाने के अलावा निर्यातक के रूप में पंजीकरण करना होगा। योजना से संबंधित दावे जमा करने के लिए मार्गदर्शन ईसीजीसी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।

सरकार का यह कदम निर्यात क्षेत्र की जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने, व्यापार प्रवाह बनाए रखने और भू-राजनीतिक तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स में अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों को समर्थन देने के लिए लिया गया है। यह एक सकारात्मक पहल है, जिस पर निर्यातक भरोसा कर सकते हैं। निर्यातकों को यह महसूस होना चाहिए कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा गया है, बल्कि सरकार उनके साथ खड़ी है और संकट के समय में उनकी मदद कर रही है।

इसी तरह, जब निर्यातकों को जल परिवहन या बीमा प्रीमियम की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो यह योजना उनके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार की पहलों के जरिए भारतीय निर्यातकों को एक सुरक्षित और स्थिर व्यापार वातावरण प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है।

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