शिवसेना (यूबीटी) का भाजपा पर हमला: महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने के संकल्प पर उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) का भाजपा पर हमला: महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने के संकल्प पर उठाए सवाल
NewsPoint•
मुंबई, 3 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महाराष्ट्र सरकार के 2029 तक राज्य को नशामुक्त बनाने के संकल्प पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में इस पहल को "पाखंडी" और "तमाशा" करार दिया है। ठाकरे गुट ने सवाल उठाया है कि एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद सत्तारूढ़ दल नशे के फलते-फूलते कारोबार पर लगाम क्यों नहीं लगा पाया। संपादकीय में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार 2014 से केंद्र में है और देवेंद्र फडणवीस भी इतने ही समय से महाराष्ट्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी ने जनता से 2029 की इस समय सीमा को याद रखने और उस समय वर्तमान नेताओं से जवाब मांगने का आग्रह किया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अवैध नशीले पदार्थों के तस्कर, शराब बनाने वाले और तस्करी करने वाले साफ तौर पर राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं। नासिक, पुणे और सतारा में अवैध शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों के पहले हुए खुलासों का हवाला देते हुए, शिवसेना (यूबीटी) ने मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व वाले राज्य गृह विभाग पर भूमि आवंटन और केमिकल गोली बनाने वाली फैक्ट्रियों से जुड़ी अहम जांचों को दबाने का आरोप लगाया है। संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि नासिक और पुणे जैसे इलाके राज्य को "उड़ता महाराष्ट्र" बना रहे हैं, जो कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का संकेत है।संपादकीय में भाजपा नेताओं की कड़ी निंदा की गई है। उन पर आरोप लगाया गया है कि वे नशीले पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले स्थानीय नागरिकों का मजाक उड़ा रहे हैं। संपादकीय में कहा गया है, "भाजपा एक बेहद पाखंडी और प्रचार-प्रसार की भूखी पार्टी है। वर्तमान में महाराष्ट्र में सभी नशीले पदार्थों के तस्कर, शराब निर्माता, सिगार और सिगरेट विक्रेता तथा भांग-गांजा बेचने वाले भाजपा के संरक्षण में हैं। भाजपा की राजनीति का पहिया इसी नशीले पदार्थों के व्यापार पर घूमता है, फिर भी यही लोग महाराष्ट्र को 'नशामुक्त' बनाने का बीड़ा उठा रहे हैं।"
शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या मुख्यमंत्री फडणवीस उन "शराब व्यापारियों" को चेतावनी देने का साहस करेंगे, जिनके शुगर मिलों के मालिक भाजपा के खेमे में शरण ले चुके हैं। या फिर वे चुनाव प्रचार के उद्देश्य को पूरा करने के लिए शराब की परिभाषा बदलने की कोशिश करेंगे। संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में नशाखोरी सिर्फ चरस, गांजा और भूरी चीनी जैसे अवैध पदार्थों तक ही सीमित नहीं है। नशा और मदहोशी केवल नशीले पदार्थों से ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और धन से भी पैदा होती है। इसलिए, महाराष्ट्र को इस नशे से भी मुक्त कराना होगा।
पार्टी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे 2029 की समय सीमा को अपने कैलेंडर में अंकित कर लें। जब यह समय सीमा समाप्त हो, तो वे वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व से इस वादे को पूरा करने के बारे में सवाल पूछें। संपादकीय में यह भी कहा गया है कि भाजपा की राजनीति का पहिया नशे के व्यापार पर ही घूमता है, फिर भी वे ही महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने की बात कर रहे हैं। यह एक बड़ा विरोधाभास है।
शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी आरोप लगाया है कि भाजपा नेताओं ने उन स्थानीय नागरिकों का मजाक उड़ाया जो नशीले पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। यह दर्शाता है कि भाजपा जमीनी हकीकत से कितनी दूर है। संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि नासिक और पुणे जैसे शहर "उड़ता महाराष्ट्र" बनते जा रहे हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नशा केवल अवैध पदार्थों तक ही सीमित नहीं है। भ्रष्टाचार और धन का लालच भी एक तरह का नशा है, जिससे महाराष्ट्र को मुक्त कराना आवश्यक है। यह एक व्यापक दृष्टिकोण है जो केवल नशीले पदार्थों पर ध्यान केंद्रित करने से कहीं अधिक है। यह महाराष्ट्र को समग्र रूप से बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है।