भारत और बेल्जियम ने रक्षा सहयोग को मजबूत किया, रक्षा औद्योगिक सहयोग पर हस्ताक्षर

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 3 सितंबर। भारत और बेल्जियम ने वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपने रक्षा सहयोग को और गहरा करने का संकल्प लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन के बीच नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौता ज्ञापनों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य भारतीय विशेषज्ञता और क्षमताओं को बेल्जियम की उन्नत तकनीक के साथ जोड़ना है। दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने और रक्षा उद्योगों के बीच नई साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक को "बेहद सार्थक" बताया। उन्होंने कहा कि यह बैठक भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा संबंधों और रक्षा औद्योगिक सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा करने का एक बेहतरीन अवसर थी। राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया इस समय बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन समस्याओं में से अधिकांश भारत और बेल्जियम के कारण उत्पन्न नहीं हुई हैं, लेकिन इन चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा। ऐसे मुश्किल समय में, एक मित्र और महत्वपूर्ण साझेदार देश के साथ मुलाकात विचारों और दृष्टिकोणों के आदान-प्रदान के लिए बहुत उपयोगी साबित होती है।
राजनाथ सिंह ने भारत और बेल्जियम के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी आपसी सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर टिकी हुई है। उन्होंने जुलाई 2026 में होने वाले भारत-बेल्जियम रणनीतिक संवाद का भी जिक्र किया, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान किया है, जिसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विशेष रूप से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत बेल्जियम और भारतीय रक्षा कंपनियों के बीच अधिक सहयोग का तहे दिल से स्वागत करता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन से जुड़े अवसरों को मिलकर आगे बढ़ा सकते हैं।

राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन के भारत दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि बेल्जियम के रक्षा मंत्री के रूप में यह उनकी भारत की दूसरी यात्रा है। उन्होंने मार्च 2025 में फ्रांकेन और बेल्जियम की राजकुमारी एस्ट्रिड के साथ हुई अपनी पिछली मुलाकातों को भी याद किया, जिन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

भारत-बेल्जियम रक्षा मंत्रियों की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तेजी से बदलते सुरक्षा और आर्थिक माहौल का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध जैसी विभिन्न वैश्विक घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में भारत और बेल्जियम का रक्षा सहयोग बढ़ाना एक महत्वपूर्ण संकेत देता है। यह दर्शाता है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को केवल पारंपरिक संबंधों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक नई दिशा देना चाहते हैं।

इस बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौता ज्ञापनों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कौशल और क्षमता को बेल्जियम की उन्नत तकनीक के साथ जोड़ना है। यह साझेदारी दोनों देशों को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने में मदद करेगी।

थियो फ्रांकेन ने भी भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि बेल्जियम भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विशेष रूप से साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उपकरणों के आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और बेल्जियम जैसी मित्र देशों के साथ सहयोग इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग न केवल दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा।

यह बैठक भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को भी बढ़ावा देती है, क्योंकि इसका उद्देश्य विदेशी तकनीक को भारतीय विनिर्माण क्षमताओं के साथ एकीकृत करना है। इससे भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

दोनों देशों के बीच यह बढ़ता रक्षा सहयोग वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। भारत अब केवल एक रक्षा आयातक देश नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण रक्षा निर्यातक और प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में उभर रहा है। बेल्जियम के साथ यह साझेदारी भारत की इस महत्वाकांक्षा को और मजबूत करती है।

यह बैठक इस बात का भी संकेत देती है कि भारत और बेल्जियम जैसे देश, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं। यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि एक अधिक स्थिर और सुरक्षित विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी योगदान देगी।