चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका का दौरा करेंगे, ट्रंप ने की पुष्टि
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका का दौरा करेंगे, ट्रंप ने की पुष्टि
NewsPoint•
वॉशिंगटन, 3 सितंबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका का दौरा करेंगे। यह घोषणा ट्रंप ने अमेरिकी यात्रा उद्योग से जुड़े अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान की, जहाँ वे विदेशी निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और चीन के साथ अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। ट्रंप ने इस मुलाकात को "बहुत रोमांचक" बताया और कहा कि वे शी जिनपिंग का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं, साथ ही उन्होंने इस मुलाकात से कई सकारात्मक नतीजों की उम्मीद जताई है। हालांकि, उन्होंने यात्रा के एजेंडे के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी। यह पहली बार है जब ट्रंप ने इस यात्रा की निश्चित तारीख बताई है, इससे पहले उन्होंने बुधवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी चीन के राष्ट्रपति के अमेरिका आने की बात कही थी।
ट्रंप ने बैठक के दौरान अमेरिका में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आने का दावा किया और कहा कि अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में चीन से काफी आगे है। एआई, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को ट्रंप अपनी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक अहम हिस्सा मानते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका इन क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है।इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने कनाडा का भी जिक्र किया और एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि कई लोगों को यह सुनकर हैरानी होती है, लेकिन कनाडा से बातचीत करना कभी-कभी चीन से भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। जब उनसे पूछा गया कि सबसे मुश्किल देश कौन है, तो उन्होंने कहा, "लोग मुझसे पूछते हैं कि सबसे मुश्किल देश कौन है? क्या वह चीन है? वियतनाम है, लेकिन मैं कहता हूं कि वास्तव में कनाडा से निपटना ज्यादा कठिन रहा है।"
यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रभाव को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा चल रही है। दोनों देशों के बीच टैरिफ (आयात शुल्क), निर्यात नियंत्रण और संवेदनशील तकनीकों को लेकर कई मतभेद हैं। टैरिफ का मतलब है कि एक देश से दूसरे देश में सामान भेजने पर लगने वाला अतिरिक्त टैक्स। निर्यात नियंत्रण का मतलब है कि कुछ खास तरह की तकनीकों या सामानों को दूसरे देशों को बेचने पर पाबंदी लगाना। इन मतभेदों के बावजूद, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होने के नाते, अमेरिका और चीन आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर बहुत निर्भर हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में मदद करती है। जैसे आपके स्मार्टफोन में वॉयस असिस्टेंट (जैसे गूगल असिस्टेंट या सिरी) या ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर आपको पसंद आने वाली चीजों के सुझाव, ये सब एआई के उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर ऐसे छोटे चिप्स होते हैं जो कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलाने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का मतलब है आधुनिक और उन्नत तरीके से सामान बनाना, जिसमें रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का इस्तेमाल होता है। ये सभी क्षेत्र किसी भी देश की आर्थिक ताकत और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ट्रंप प्रशासन लगातार चीन पर अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोप लगाता रहा है, जिसमें बौद्धिक संपदा की चोरी और जबरन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल हैं। बौद्धिक संपदा का मतलब है किसी व्यक्ति या कंपनी का बनाया हुआ नया विचार या आविष्कार, जैसे कोई नई तकनीक या डिजाइन। जबरन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का मतलब है कि किसी कंपनी को अपनी तकनीक दूसरे देश की कंपनी को देने के लिए मजबूर करना। इन आरोपों के चलते दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें दोनों एक-दूसरे पर टैरिफ लगा रहे हैं।
यह मुलाकात दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को कम करने और व्यापारिक संबंधों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत से क्या ठोस नतीजे निकलते हैं और क्या वे व्यापार, तकनीक और अन्य मुद्दों पर किसी समझौते पर पहुंच पाते हैं। दुनिया भर की निगाहें इस मुलाकात पर टिकी हैं, क्योंकि इसके परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकते हैं।