मां दूनागिरी मंदिर अल्मोड़ा: 51 शक्तिपीठों में से एक, रामायण काल से जुड़ा इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था और अध्यात्म का एक अनूठा संगम है। यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में गिना जाता है और कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ है। करीब 500 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जाने वाला यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं से जुड़ा यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मंदिर की महिमा का बखान करते हुए लोगों से दर्शन करने की अपील की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, "अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट इलाके में मौजूद मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता का एक दिव्य संगम है। मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पवित्र धाम अनगिनत भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। नवरात्रि के पावन मौके पर यहां खास पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिसके दौरान भक्त दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। अल्मोड़ा जिले में आने पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें।"
मां दूनागिरी मंदिर में मां दुर्गा के वैष्णवी रूप, जिन्हें मां दूनागिरी देवी के नाम से जाना जाता है, की पिंडी रूप में पूजा होती है। यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ माना जाता है। इस मंदिर का इतिहास रामायण और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेने द्रोणागिरी पर्वत को ले जा रहे थे, तब उस पर्वत का एक हिस्सा यहीं गिरा था। एक और कथा के अनुसार, पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने भी इसी स्थान पर तपस्या की थी।

भारत के कई देवी मंदिरों में नारियल फोड़ने की प्रथा है, लेकिन मां दूनागिरी मंदिर में ऐसा नहीं होता है। यहां भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले प्रसाद, जो कि सूखा नारियल होता है, उसे तोड़ा नहीं जाता। बल्कि, श्रद्धालुओं को वह साबुत ही वापस दे दिया जाता है। यह एक अनोखी परंपरा है जो इस मंदिर को खास बनाती है।

मंदिर परिसर में लगातार भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जिससे भक्तों को भोजन की सुविधा मिलती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। अल्मोड़ा जिले की ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर, शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के साथ भक्तों को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। नवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जिसके लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। मुख्यमंत्री की अपील के बाद, इस मंदिर के दर्शन के लिए लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है। यह मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्रकृति का एक ऐसा संगम है जो हर किसी को अपनी ओर खींचता है।