राजगढ़ वन रेंज में 9 करोड़ रुपये के भुगतान में वित्तीय गड़बड़ी की जांच, ग्रामीणों की भागीदारी पर सवाल

NewsPoint
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राजस्थान के राजगढ़ वन रेंज में ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समितियों के नाम पर हुए करोड़ों के भुगतान में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पिछले दस सालों के बैंक रिकॉर्ड की जांच में करीब 80 ऐसे नाम मिले हैं, जिन्हें अलग-अलग समितियों में मजदूर बताकर 2019 से 2024 के बीच करीब 9 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि क्या इन लोगों ने वाकई काम किया था या यह पैसा हड़प लिया गया। इस पूरे मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

राजगढ़ वन रेंज की सात ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समितियों में मजदूरी और विकास कार्यों के भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जैसे-जैसे वित्तीय गड़बड़ी की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भुगतान व्यवस्था में अनियमितताओं के नए मामले सामने आ रहे हैं। समितियों के पिछले दस वर्षों के बैंक रिकॉर्ड की जब जांच हुई, तो कई ऐसे नाम सामने आए जिन्हें अलग-अलग समितियों में मजदूर बताकर लंबे समय तक भुगतान किया गया।
जांच में जो रिकॉर्ड सामने आया है, उसके मुताबिक करीब 80 ऐसे लोग मिले हैं जिनके खातों में सालों तक मजदूरी के नाम पर पैसे भेजे गए। यह चौंकाने वाली बात है कि साल 2019 से 2024 के बीच इन लोगों के खातों में करीब 9 करोड़ रुपए पहुंचने का रिकॉर्ड मिला है। अब जांच एजेंसियां इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि जिन लोगों के नाम पर यह भारी-भरकम रकम दी गई, क्या उन्होंने सचमुच समितियों के विकास कार्यों में मजदूरी की थी या नहीं।

इस पूरे मामले में भुगतान प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही, इसकी भी गहन जांच की जा रही है। जांच के लिए बैंक स्टेटमेंट, मजदूरों की सूची, किए गए कार्यों के रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वित्तीय अनियमितताओं की असली तस्वीर साफ नहीं हो पाएगी।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर लोगों में काफी चर्चा है। उनका कहना है कि वन समितियों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की मदद से जंगल को बचाना और विकास के काम करना है। लेकिन अगर भुगतान में ही गड़बड़ी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह मामला वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।