जेफरीज रिपोर्ट: भारत की 'नई औद्योगिक क्रांति' में घरेलू बाजार की अहम भूमिका, स्पेस, सेमीकंडक्टर में तेज ग्रोथ

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 10 सितंबर: ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की 'नई औद्योगिक क्रांति' में देश का अपना बाज़ार सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में ज़बरदस्त ग्रोथ और सरकारी मदद से प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बड़े घरेलू अवसर, प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती रुचि और सरकार के सहयोग से नए उद्योग फल-फूल रहे हैं। इससे देश की अपनी क्षमताएं बढ़ रही हैं और हम दुनिया में और बेहतर मुकाबला कर पा रहे हैं।

जेफरीज की रिपोर्ट में उन खास कदमों का ज़िक्र है जो इन उभरते सेक्टरों को आगे बढ़ा रहे हैं। जैसे, स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलना, डेटा सेंटरों को टैक्स में छूट देना, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर के लिए खास इंसेंटिव स्कीम लाना, 'लोकलाइजेशन' यानी चीज़ों को देश में ही बनाने पर ज़ोर देना और सरकार द्वारा जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) जैसी ज़रूरी चीज़ों की खरीद करना।
रिपोर्ट बताती है कि भारत उन गिने-चुने देशों में से है जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। हमारी क्षमताएं दुनिया के बाकी देशों से मुकाबला करने लायक हैं। भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक अपने स्पेस सेक्टर को 5 गुना बड़ा करके 40-45 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दे। इसमें स्काईरूट, पिक्सेल और अग्निकुल जैसी प्राइवेट कंपनियां भी अपना योगदान दे रही हैं और कमर्शियल काम की ओर बढ़ रही हैं।

सेमीकंडक्टर के मामले में, भारत अब सिर्फ योजनाओं से आगे बढ़कर असल काम करने की ओर बढ़ रहा है। करीब 20 बिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है। एक चिप बनाने का कारखाना (चिप फैब) लगाया जा रहा है और कई ओएसएटी (आउटसाइड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) प्रोजेक्ट्स में प्रोडक्शन शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 13 बिलियन डॉलर का एक और इंसेंटिव प्लान सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मज़बूत करेगा।

इसके अलावा, भारत की डेटा सेंटर क्षमता पिछले पांच सालों में 5 गुना बढ़कर 2 गीगावाट हो गई है। उम्मीद है कि अगले पांच सालों में यह 10 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। इससे पावर, कूलिंग, कंस्ट्रक्शन और नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में 45 बिलियन डॉलर के निवेश का मौका बनेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की बात करें तो, भारत अब सिर्फ चीज़ों को जोड़ने (असेंबली) से आगे बढ़कर ज़्यादातर सामान देश में ही बनाने और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 6 सालों में मोबाइल कंपोनेंट्स में देश में बनने वाले सामान का हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़कर करीब 50 प्रतिशत हो जाएगा।

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर पीवी (फोटोवोल्टेइक) मैन्युफैक्चरर बन गया है। अभी 35 गीगावाट सेल बनाने की क्षमता चालू है और 100 गीगावाट क्षमता पर काम चल रहा है। जेफरीज का अनुमान है कि 2030 तक सोलर वैल्यू चेन का 90 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बनने लगेगा।

सस्ती मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग टैलेंट की वजह से, भारत को ग्लोबल एयरोस्पेस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई के बीच जो असंतुलन है, उसका भी फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बोइंग और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही भारत से हर साल 1.4-1.6 अरब डॉलर का सामान खरीद रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां ग्लोबल ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) और टियर-1 कंपनियों को सप्लाई कर रही हैं।

यह सब दिखाता है कि भारत 'नई औद्योगिक क्रांति' के लिए तैयार है। सरकार की नीतियां और प्राइवेट सेक्टर की मेहनत मिलकर देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन सेक्टरों में हो रही तरक्की से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती मिलेगी। यह एक ऐसा दौर है जब भारत सिर्फ सामान खरीदने वाला नहीं, बल्कि दुनिया को सामान पहुंचाने वाला देश बन रहा है।