चेन्नई ऑटो रिक्शा किराया वृद्धि: 19 सितंबर को विरोध प्रदर्शन, 13 साल से नहीं हुआ संशोधन

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चेन्नई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालकों ने 19 सितंबर को चेन्नई में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। वे 13 साल से जस के तस बने ऑटो के किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। ऑटो-रिक्शा ट्रेड यूनियनों के महासंघ ने बताया कि चालक एगमोर के राजारथिनम स्टेडियम के पास इकट्ठा होंगे और मीटर के किराये में संशोधन के लिए तुरंत सरकारी आदेश जारी करने की मांग करेंगे। यूनियन के नेताओं का कहना है कि राज्य भर के करीब पांच लाख ड्राइवर पेट्रोल, रखरखाव और बीमा जैसी बढ़ती लागतों से परेशान हैं। यह फैसला विजय सरकार के मई में सत्ता संभालने के बाद परिवहन विभाग के साथ हुई तीन दौर की बातचीत के बाद लिया गया है।

27 अगस्त को हुई आखिरी बैठक में यूनियनों ने एक किराया सूची पेश की थी। इसमें पहले 1.5 किलोमीटर के लिए न्यूनतम 60 से 70 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 25 से 30 रुपये किराया प्रस्तावित किया गया था। यूनियन नेताओं ने बताया कि बातचीत में शामिल यात्री प्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन किया। अब फेडरेशन ने अपनी मांग को पक्का करते हुए पहले 1.5 किलोमीटर के लिए 60 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 30 रुपये किराया मांगा है। साथ ही, अलग से प्रतीक्षा शुल्क (waiting charges) और रात के समय के लिए अतिरिक्त शुल्क (night charges) की भी मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि बार-बार बातचीत के बावजूद उन्हें कोई पक्का आश्वासन नहीं मिला है।
चालकों को उम्मीद थी कि विधानसभा में परिवहन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान इस मामले में कोई फैसला आ जाएगा। लेकिन, परिवहन मंत्री ए. विजय तमिलन पार्थिबन ने कहा कि घोषणा जल्द ही की जाएगी। इससे यूनियनें निराश हो गईं। इससे पहले, सरकार की एक समिति ने 2024 में 40 रुपये का शुरुआती किराया और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 18 रुपये किराया तय करने की सिफारिश की थी। लेकिन, वह प्रस्ताव अभी तक अटका हुआ है। बातचीत के बाद, अधिकारियों का कहना है कि वे 50 रुपये का शुरुआती किराया और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 22 से 25 रुपये किराया तय करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। यूनियनों का कहना है कि आखिरी फैसला राज्य गृह (परिवहन) विभाग को ही लेना चाहिए।

साल 2013 में आखिरी बार किराये में बदलाव किया गया था। तब पहले 1.8 किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया 25 रुपये और उसके बाद हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 12 रुपये तय किया गया था। यूनियनों का तर्क है कि ये दरें आज के खर्चों से बहुत कम हैं और मीटर वाली ऑटो सेवाओं को चलाना मुश्किल बना दिया है। इस बीच, यात्रियों ने शिकायत की है कि ऐप-आधारित टैक्सी सेवाएं (app-based aggregators) ज्यादा पैसे वसूलती हैं। वहीं, कुछ ड्राइवर बताए गए अनुमान से ज्यादा पैसे मांगते हैं। परिवहन कार्यकर्ताओं ने एक तय किराया ढांचा लागू करने, ऐप-आधारित सेवाओं को सख्ती से नियंत्रित करने और शिकायतों पर कार्रवाई करने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि किराये में बदलाव समिति की सिफारिशों पर आधारित होगा। लेकिन, यूनियनों का कहना है कि केवल समय पर जारी किया गया सरकारी आदेश ही उनके आंदोलन को रोक सकता है।

ऑटो चालकों के लिए बढ़ती महंगाई एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर ही खर्च हो रहा है। इसके अलावा, ऑटो के रखरखाव और बीमा का खर्च भी बढ़ गया है। इन सब खर्चों को देखते हुए, 2013 में तय किया गया किराया आज के समय में बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। यूनियनों का कहना है कि अगर किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई, तो कई ड्राइवर इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।

यात्रियों को भी ऑटो सेवाओं से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐप-आधारित टैक्सी सेवाएं अक्सर 'डायनामिक प्राइसिंग' (dynamic pricing) का इस्तेमाल करती हैं, जिसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर किराया भी बढ़ जाता है। इससे यात्रियों को अचानक ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। वहीं, कुछ ऑटो चालक मीटर से ज्यादा पैसे वसूलते हैं, जिससे यात्रियों को ठगा हुआ महसूस होता है। यात्रियों का कहना है कि सरकार को एक पारदर्शी और उचित किराया प्रणाली लागू करनी चाहिए, ताकि उन्हें भी राहत मिल सके।

परिवहन विभाग के साथ हुई बातचीत में यूनियनों ने यात्रियों की शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने मांग की है कि ऐप-आधारित सेवाओं को भी ऑटो की तरह ही नियमों के दायरे में लाया जाए। साथ ही, यात्रियों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। यूनियनों का कहना है कि जब तक सरकार इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द किराये में बढ़ोतरी का आदेश जारी करे।