वीर अब्दुल हमीद के बलिदान दिवस पर देश ने किया नमन, 1965 युद्ध के महानायक को श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली, 10 सितंबर. 1965 के भारत-Pakistan युद्ध के हीरो, परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद को उनके बलिदान दिवस पर पूरे देश ने याद किया. इस मौके पर Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला, Rajasthan के Chief Minister भजनलाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य और कई अन्य बड़े नेताओं ने उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया. वीर अब्दुल हमीद ने युद्ध में दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया था.

Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "1965 के भारत-Pakistan युद्ध में अदम्य साहस और असाधारण युद्ध कौशल का परिचय देकर अपना जीवन न्योछावर कर देने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन. अपने साहस और सूझबूझ के साथ उन्होंने दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त किया तथा विषम परिस्थिति में भी मोर्चे पर डटे रहे. युद्धभूमि में सर्वोच्च बलिदान देकर कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद जी ने भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को और समृद्ध किया. कृतज्ञ राष्ट्र उनके शौर्य और बलिदान को सदैव स्मरण करता रहेगा."
Rajasthan के Chief Minister भजनलाल शर्मा ने कहा, "1965 के भारत-पाक युद्ध में अपने अदम्य साहस, असाधारण पराक्रम और दृढ़ संकल्प से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन! मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्रभक्ति प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव अमर रहेगी."

उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य ने भी वीर अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा, "1965 के भारत-Pakistan युद्ध में वीर अब्दुल हमीद ने अद्भुत साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त कर मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया. उनका शौर्य और राष्ट्रभक्ति सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा."

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा, "1965 के भारत-Pakistan युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों के टैंकों को ध्वस्त कर वीरगति को प्राप्त होने वाले, परमवीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि. राष्ट्ररक्षा के लिए उनके द्वारा दिया गया यह बलिदान सदैव आने वाली पीढ़ियों के हृदय में देशभक्ति की अलख जगाता रहेगा."

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने लिखा, "1965 के भारत-Pakistan युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित शहीद वीर अब्दुल हमीद जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन. युद्ध के दौरान अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए उन्होंने दुश्मन के पैटन टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया. उनकी वीरता, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान की गाथा सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी."

वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धुपही गांव में हुआ था. वे भारतीय सेना में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार के पद पर तैनात थे. 1965 के भारत-Pakistan युद्ध के दौरान, उन्होंने असम राइफल्स की 4वीं बटालियन में सेवा दी. खेमकरण सेक्टर में, उन्होंने अकेले ही दुश्मन के कई पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया था. उनकी बहादुरी ने भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. इसी अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

वीर अब्दुल हमीद की कहानी आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने दिखाया कि कैसे एक आम सैनिक भी असाधारण परिस्थितियों में देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर सकता है. उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि देश की रक्षा के लिए हर नागरिक को तत्पर रहना चाहिए. उनके शौर्य और देशभक्ति को पूरा राष्ट्र हमेशा याद रखेगा. यह बलिदान दिवस हमें उन वीर सपूतों को नमन करने का अवसर देता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की आन-बान और शान की रक्षा की. वीर अब्दुल हमीद जैसे वीर सैनिक ही भारत की असली ताकत हैं.