दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को राष्ट्र निर्माण पर ध्यान देने की सलाह दी
दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को राष्ट्र-निर्माण पर ध्यान देने की सलाह दी
NewsPoint•
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को कॉलेज के छात्रों को भविष्य की चिंता छोड़कर सीखने और देश के निर्माण में योगदान देने की सलाह दी। विधानसभा के 'यूथ आउटरीच प्रोग्राम' के तहत दिल्ली विधानसभा का दौरा करने आए छात्रों से बातचीत करते हुए स्पीकर ने कहा कि कल के भारत को आकार देने में हर युवा की अहम भूमिका है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को कक्षाओं और किताबों से बाहर निकालकर लोकतांत्रिक संस्थाओं का अनुभव कराना है। गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज, सुखदेव कॉलेज, लॉ सेंटर-I, लॉ सेंटर-II और शहीद भगत सिंह कॉलेज के छात्रों ने विधानसभा का दौरा किया। इस दौरे ने विभिन्न विषयों के छात्रों को एक साथ लाकर लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों, सार्वजनिक जीवन और युवाओं की जिम्मेदारियों पर चर्चा के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान किया।
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को अपनी यात्रा पर भरोसा रखने और पढ़ाई, नौकरी या सामाजिक दबावों को अपनी काबिलियत पर हावी न होने देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कोई अपने क्षेत्र में देश के लिए योगदान दे सकता है और देश का निर्माण सिर्फ राजनीति या सरकारी पदों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "आप जो भी पेशा चुनें, उसे ईमानदारी, बेहतरीन काम और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ करें।" स्पीकर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि लोकतंत्र की मजबूती अंततः जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों पर ही निर्भर करती है। उन्होंने छात्रों को अलग-अलग विचारों को सुनने, सवाल पूछने और कोई भी राय बनाने से पहले मुद्दों को अच्छी तरह समझने की आदत डालने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि असहमति और बहस एक जीवंत लोकतंत्र का स्वाभाविक और ज़रूरी हिस्सा हैं, बशर्ते वे संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के दायरे में हों।इस बातचीत के दौरान, छात्रों ने विधानसभा के कामकाज, चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका, लोकतांत्रिक भागीदारी और नागरिकों व सार्वजनिक संस्थाओं के बीच संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर स्पीकर गुप्ता के साथ खुलकर चर्चा की। छात्रों ने इस बातचीत में बड़े उत्साह से भाग लिया। उन्होंने सवाल पूछे और समकालीन मुद्दों तथा बदलते भारत में युवा नागरिकों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
इस शैक्षिक दौरे के एक हिस्से के तौर पर, छात्रों ने ऐतिहासिक दिल्ली विधानसभा परिसर का गाइडेड टूर भी किया। उन्हें इसकी खास वास्तुकला और भारत के संसदीय इतिहास में इसके महत्वपूर्ण स्थान के बारे में बताया गया। डॉक्यूमेंट्री और प्रेजेंटेशन के माध्यम से, छात्रों ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के साथ इस इमारत के जुड़ाव और इसकी विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण हस्तियों और घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों को असेंबली की यादगार 'कॉफी टेबल बुक'-'एक शताब्दी यात्रा' के बारे में भी बताया गया, जिसमें इस संस्था के ऐतिहासिक सफर और संसदीय विरासत का जिक्र है। इस दौरे के दौरान छात्र मुख्य असेंबली चैंबर में भी गए, जहाँ उन्हें उस माहौल को करीब से देखने का मौका मिला जिसमें विधायी बहस, चर्चा और कामकाज होते हैं।
स्पीकर गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने भविष्य की चिंता करने के बजाय सीखने और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, "कल के भारत को आकार देने में हर युवा की भूमिका है।" यह पहल युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से की गई थी।
छात्रों ने विधानसभा के कामकाज को करीब से देखा और समझा। उन्हें यह भी बताया गया कि कैसे चुने हुए प्रतिनिधि जनता की आवाज़ बनकर काम करते हैं। इस दौरे ने छात्रों को सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सीखा कि कैसे नागरिक सार्वजनिक संस्थाओं के साथ मिलकर एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य युवाओं को देश के लोकतांत्रिक ढांचे और उसकी संस्थाओं के बारे में जागरूक करना था। छात्रों ने सीखा कि कैसे वे अपने विचारों और कार्यों से देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। स्पीकर गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र-निर्माण केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे जो भी काम करें, उसे पूरी लगन और जिम्मेदारी से करें।
छात्रों ने विधानसभा के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में भी जाना। उन्हें बताया गया कि कैसे यह इमारत भारत के संसदीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। 'एक शताब्दी यात्रा' जैसी किताबों के माध्यम से, उन्हें संस्था के लंबे और गौरवशाली सफर से अवगत कराया गया। मुख्य असेंबली चैंबर में जाकर, छात्रों ने उस स्थान को देखा जहाँ देश के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। यह अनुभव उनके लिए बहुत प्रेरणादायक था।
कुल मिलाकर, यह 'यूथ आउटरीच प्रोग्राम' छात्रों के लिए एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ। इसने उन्हें न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं के बारे में सिखाया, बल्कि उन्हें देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।