नेपाल बाढ़ पीड़ितों को उत्तरी वर्जीनिया में श्रद्धांजलि, लापता लोगों के लिए प्रार्थना

NewsPoint
Navbharat Times
उत्तरी वर्जीनिया में नेपाल की भीषण बाढ़ में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए. लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को याद किया और इस आपदा में अपने लापता प्रियजनों का इंतजार कर रहे परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई. साउथ राइडिंग टाउन ग्रीन में आयोजित इस सर्वधर्म प्रार्थना सभा में दोस्त, पड़ोसी, जनप्रतिनिधि, Police अधिकारी और विभिन्न धर्मों के नेता शामिल हुए. भारतीय मूल के अमेरिकी लॉमेकर सुहास सुब्रमण्यम ने बताया कि लापता लोगों में से कई वर्जीनिया के रहने वाले हैं, जिनमें से कुछ लाउडाउन काउंटी से थे, जहां यह प्रार्थना सभा आयोजित की गई. उन्होंने कहा, "मैं उन्हें उस समय से जानता हूं जब मैं कुछ भी नहीं था, कांग्रेस का सदस्य बनना तो बहुत दूर की बात थी. ऐसी घटना होना बेहद दुखद है." यह आयोजन परिवारों और दोस्तों को अपना दुख साझा करने का अवसर देने के साथ-साथ समुदाय को यह संदेश देने के लिए था कि लापता लोगों के परिवार अकेले नहीं हैं. सुब्रमण्यम ने कहा कि परिवारों को अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है और उन्हें लगातार अपडेट भी नहीं मिल रहे हैं. उनका कार्यालय अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और उन्होंने खुद कई बार विदेश मंत्रालय (स्टेट डिपार्टमेंट) के अधिकारियों से बात की है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने बचाव अभियान में मदद के लिए उपकरणों से भरा एक सैन्य विमान भेजा है. बरामद किए गए शवों की पहचान में मदद के लिए अधिकारियों की ओर से परिजनों के डीएनए नमूने जुटाए जा रहे हैं. लाउडाउन काउंटी के शेरिफ भी कार्यक्रम में मौजूद थे और उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में पूरा समुदाय एक परिवार की तरह साथ खड़ा है. उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों की मदद करता रहेगा. लाउडाउन काउंटी के निवासी और शेरिफ कार्यालय से जुड़े श्रीधर नागराडी ने बताया कि काउंटी के सात लोग अब भी लापता हैं. उन्होंने कहा कि परिवार और समुदाय के प्रतिनिधि हर रात टेलीफोन पर बातचीत करते हैं ताकि जानकारी साझा की जा सके और जरूरत पड़ने पर मदद पहुंचाई जा सके. उन्होंने कहा, "हम हर रात नौ बजे एक कॉल करते हैं. किसी को भी मदद की जरूरत हो, हम उसके लिए मौजूद हैं." पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रार्थनाएं, व्यक्तिगत यादें और मौन श्रद्धांजलि का सिलसिला चलता रहा. अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधियों ने सांत्वना देने वाले संदेश दिए. आयोजकों ने कहा, "नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले सभी लोगों और अब भी लापता अमेरिकी नागरिकों तथा निवासियों के लिए हमारे दिल दुख से भरे हुए हैं." सभा का समापन एक और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ.

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिंदगियां छीन लीं और कई लोगों को लापता कर दिया. इस दुखद घटना के बाद उत्तरी वर्जीनिया में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. वे उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने आए थे जिन्होंने अपनी जान गंवाई. लोगों ने अपने हाथों में मोमबत्तियां जलाईं और उन परिवारों के साथ खड़े हुए जो अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं. यह एक ऐसा पल था जब पूरा समुदाय एक साथ आया, अपने दुख को साझा किया और एक-दूसरे को सहारा दिया.
साउथ राइडिंग टाउन ग्रीन में आयोजित यह प्रार्थना सभा सिर्फ एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह समुदाय की एकजुटता का प्रतीक थी. यहां दोस्त, पड़ोसी, जनप्रतिनिधि, Police अधिकारी और विभिन्न धर्मों के नेता एक साथ आए. इस सभा में भारतीय मूल के अमेरिकी लॉमेकर सुहास सुब्रमण्यम भी शामिल हुए. उन्होंने बताया कि लापता लोगों में से कई वर्जीनिया के रहने वाले हैं. इनमें से कुछ तो लाउडाउन काउंटी से थे, जहां यह सभा हो रही थी. सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि वे इनमें से कई लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानते थे. उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "मैं उन्हें उस समय से जानता हूं जब मैं कुछ भी नहीं था, कांग्रेस का सदस्य बनना तो बहुत दूर की बात थी. ऐसी घटना होना बेहद दुखद है." यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत दुखद था.

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परिवारों और दोस्तों को अपने दुख को बांटने का एक मंच देना था. साथ ही, यह पूरे समुदाय को यह संदेश देना था कि जो लोग अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, वे अकेले नहीं हैं. सुहास सुब्रमण्यम ने बताया कि परिवारों को अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. उन्हें यह भी नहीं पता कि वास्तव में क्या हो रहा है और उन्हें लगातार अपडेट भी नहीं मिल रहे हैं. यह अनिश्चितता उनके लिए बहुत कष्टदायक है.

सुहास सुब्रमण्यम ने आश्वासन दिया कि उनका कार्यालय अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है. उन्होंने खुद कई बार विदेश मंत्रालय (स्टेट डिपार्टमेंट) के अधिकारियों से बात की है. उनकी टीम लगभग हर दिन उनसे संपर्क में रहती है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने बचाव अभियान में मदद के लिए उपकरणों से भरा एक सैन्य विमान भेजा है. यह एक बड़ी मदद है जो खोज और बचाव अभियान को गति दे सकती है. रक्षा विभाग ने भी खोज और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरणों के साथ एक सैन्य विमान वहां भेजा है.

सुब्रमण्यम ने आगे बताया कि बरामद किए गए शवों की पहचान में मदद के लिए अधिकारियों की ओर से परिजनों के डीएनए नमूने जुटाने का काम किया जा रहा है. यह एक संवेदनशील प्रक्रिया है जो परिवारों को अपने प्रियजनों की पहचान करने में मदद करेगी. लाउडाउन काउंटी के शेरिफ भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा समुदाय एक परिवार की तरह साथ खड़ा है. उन्होंने कहा, "हम सब एक बड़ा परिवार हैं. यहां जुटे लोगों को देखकर साफ पता चलता है कि वे कितने समर्पण के साथ प्रार्थना कर रहे हैं और हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं." उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों की मदद करता रहेगा. उनकी भूमिका परिवारों का सहयोग करने, इस कार्यक्रम को समर्थन देने और जिन लोगों को किसी भी तरह की मदद की जरूरत है, उनकी सहायता करने की है.

लाउडाउन काउंटी के निवासी और शेरिफ कार्यालय से जुड़े श्रीधर नागराडी ने बताया कि काउंटी के सात लोग अब भी लापता हैं. यह एक चिंताजनक आंकड़ा है. उन्होंने कहा कि परिवार और समुदाय के प्रतिनिधि हर रात टेलीफोन पर बातचीत करते हैं ताकि जानकारी साझा की जा सके और जरूरत पड़ने पर मदद पहुंचाई जा सके. उन्होंने कहा, "हम हर रात नौ बजे एक कॉल करते हैं. किसी को भी मदद की जरूरत हो, हम उसके लिए मौजूद हैं." यह दिखाता है कि समुदाय एक-दूसरे का कितना ख्याल रख रहा है.

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रार्थनाएं, लोगों की व्यक्तिगत यादें और मौन श्रद्धांजलि का सिलसिला चलता रहा. अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधियों ने लोगों को सांत्वना देने वाले संदेश दिए. प्रतिभागियों से कहा गया कि वे अपनी मोमबत्तियां ऊंची उठाएं, ताकि इस त्रासदी से प्रभावित हर व्यक्ति को याद किया जा सके. आयोजकों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले सभी लोगों और अब भी लापता अमेरिकी नागरिकों तथा निवासियों के लिए हमारे दिल दुख से भरे हुए हैं." यह एक मार्मिक क्षण था जिसने सभी को झकझोर दिया. सभा का समापन एक और मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ, जो उन सभी लोगों को याद करने का एक तरीका था जिन्होंने इस भयानक बाढ़ में अपनी जान गंवाई.

रेकमेंडेड खबरें