हैवान फिल्म रिव्यू: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की दमदार भिड़ंत, प्रियदर्शन का निर्देशन

NewsPoint
Navbharat Times
'हैवान': अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ज़बरदस्त टक्कर, जो आपको सीट से बांधे रखेगी!

निर्देशक प्रियदर्शन की नई फिल्म 'हैवान' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और यह फिल्म अपने दमदार कलाकारों, खासकर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ज़बरदस्त केमिस्ट्री के दम पर दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। यह एक साइकोलॉजिकल एक्शन क्राइम थ्रिलर है, जो 18 साल बाद इन दोनों बड़े सितारों को एक साथ लाती है। फिल्म की कहानी एक खतरनाक अपराधी और एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के बीच की जंग है, जहाँ सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि दिमाग, सूझबूझ और हिम्मत भी अहम भूमिका निभाती है। अक्षय कुमार ने अपने अब तक के करियर की सबसे डार्क और खतरनाक परफॉर्मेंस दी है, वहीं सैफ अली खान ने भी एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के किरदार में जान डाल दी है। दोनों के बीच की यह दिमागी और शारीरिक जंग ही फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।
अक्षय कुमार का खौफनाक अंदाज़, सैफ का संयमित अभिनय

'हैवान' की सबसे बड़ी ताकत इसके दो मुख्य कलाकार हैं, जो कहानी में एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत खड़े नज़र आते हैं। एक तरफ अक्षय कुमार का खतरनाक और डर पैदा करने वाला किरदार है, तो दूसरी तरफ सैफ अली खान का शांत और समझदार अंदाज़। निर्देशक प्रियदर्शन की यह साइकोलॉजिकल एक्शन क्राइम थ्रिलर 18 साल बाद अक्षय कुमार और सैफ अली खान को एक साथ लेकर आती है। कहानी मूल रूप से एक खतरनाक अपराधी और दृष्टिबाधित व्यक्ति के बीच चलने वाली ऐसी जंग है, जिसमें ताकत के साथ-साथ दिमाग, सूझबूझ और हिम्मत भी मायने रखती है।

फिल्म का पहला बड़ा टॉकिंग पॉइंट अक्षय कुमार हैं, जिन्होंने अब तक की अपनी सबसे डार्क और सबसे खतरनाक परफॉर्मेंस में से एक दी है। वह विलेन के किरदार को ऊंची आवाज़ और ज़रूरत से ज़्यादा गुस्से के साथ पेश नहीं करते। इसके बजाय उनके किरदार में एक अजीब सी शांति है, जो उसे और ज़्यादा डरावना बनाती है। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग बोलने का अंदाज़ देखकर परशुराम की अगली चाल का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। उनके अभिनय में मौजूद यह शांत खौफ फिल्म में एक टेंशन का एलिमेंट लगातार बनाए रखता है। अक्षय कुमार का यह किरदार, जिसे 'परशुराम' नाम दिया गया है, दर्शकों के मन में डर पैदा करने में पूरी तरह कामयाब होता है। वह बिना चिल्लाए या ज़्यादा गुस्सा दिखाए भी अपने किरदार की क्रूरता और खतरनाक इरादों को बखूबी दर्शाते हैं। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है, जो उनके किरदार की गहराई को दिखाती है।

वहीं सैफ अली खान श्याम के किरदार में बेहद प्रभावी दिख रहे हैं। दृष्टिबाधित श्याम अचानक एक बेहद खतरनाक स्थिति में फंस जाता है और उससे निकलने के लिए उसे अपनी समझ, सुनने की क्षमता, आसपास की चीज़ों को महसूस करने की ताकत और हिम्मत पर भरोसा करना पड़ता है। सैफ इस किरदार की कमजोरी को ज़रूरत से ज़्यादा दिखाने की कोशिश नहीं करते। वह श्याम की समझदारी और जुझारूपन को भी सामने रखते हैं। खासकर अक्षय के साथ आमने-सामने वाले सीन में सैफ का संयम और अभिनय बेहद असरदार लगता है। सैफ अली खान ने 'श्याम' के किरदार को बहुत ही संजीदगी से निभाया है। एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के तौर पर उनकी चुनौतियाँ और उनसे लड़ने का उनका तरीका दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। वह अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद अपनी मानसिक शक्ति और हिम्मत से कैसे मुश्किलों का सामना करते हैं, यह देखना काबिले तारीफ है।

अक्षय और सैफ की भिड़ंत: फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण

यही अक्षय और सैफ की भिड़ंत 'हैवान' का सबसे बड़ा आकर्षण है। दोनों के बीच होने वाला टकराव सिर्फ फिजिकल नहीं है, बल्कि दिमागी खेल भी है। परशुराम के पास ताकत, आत्मविश्वास और परिस्थितियों को अपने हिसाब से मोड़ने की क्षमता है, जबकि श्याम को हर कदम पर अपनी समझ और सहज बुद्धि का सहारा लेना पड़ता है। यही अंतर दोनों के सीन में रोमांच पैदा करता है। दर्शक लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि अगली चाल किसकी होगी।

यह टकराव फिल्म की जान है। परशुराम अपनी ताकत और चालाकी से श्याम को फंसाने की कोशिश करता है, जबकि श्याम अपनी इंद्रियों और समझदारी से हर बार बच निकलता है। यह दिमागी खेल दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखता है। हर सीन में यह सवाल उठता है कि कौन किस पर भारी पड़ेगा। यह सिर्फ एक नायक-खलनायक की लड़ाई नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग सोच और क्षमताओं के बीच का संघर्ष है।

पहल चौधरी का सरप्राइज, सहायक कलाकारों का दमदार साथ

फिल्म में पहल चौधरी एक बड़ा सरप्राइज बनकर सामने आती हैं। युवा कलाकार ने अपने किरदार को काफी आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनके अभिनय में मासूमियत और सच्चाई है। उनकी मौजूदगी कहानी में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है और दर्शक को किरदारों के साथ जोड़ने में मदद करती है। बड़े कलाकारों के बीच भी वह अपनी अलग जगह बनाने में सफल रहती हैं। पहल चौधरी का किरदार कहानी में एक नई जान डालता है। उनकी मासूमियत और सच्चाई दर्शकों को सीधे दिल से जोड़ती है। बड़े कलाकारों के बीच भी वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही हैं।

सहायक कलाकारों ने भी फिल्म को मजबूती दी है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी अपने-अपने किरदारों में सहज और प्रभावी नज़र आते हैं। शारिब हाशमी पुलिस अधिकारी की भूमिका में कहानी के जांच वाले हिस्से को स्वाभाविक बनाए रखते हैं। वहीं दिवंगत अभिनेता असरानी का अभिनय भी दिल छूता है और याद रह जाता है। स्क्रीन पर उनका आखिरी बार दिखना उनकी मौजूदगी को और भी इमोशनल अहमियत देता है।

सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी जैसे कलाकारों ने भी अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। शारिब हाशमी ने एक पुलिस अधिकारी के तौर पर कहानी के जांच वाले हिस्से को विश्वसनीय बनाया है। और सबसे खास बात, दिवंगत अभिनेता असरानी का अभिनय, जो इस फिल्म में उनका आखिरी काम है, दर्शकों के दिलों को छू जाता है। उनकी मौजूदगी फिल्म को एक भावनात्मक गहराई देती है।

प्रियदर्शन का निर्देशन: भावनाओं और रोमांच का बेहतरीन संतुलन

प्रियदर्शन एक बार फिर साबित करते हैं कि उन्हें कमर्शियल सिनेमा की नब्ज अच्छी तरह समझ आती है। 'हैवान' उनके करियर की 98वीं फिल्म है और इसमें वह भावनाओं, रोमांच, तनाव और मनोरंजन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखते हैं। फिल्म की लंबाई 2 घंटे 44 मिनट है, लेकिन ऐसा कम ही लगता है कि कहानी को बेवजह खींचा जा रहा है। परफॉर्मेंस, टकराव और थ्रिलर का लगातार आगे बढ़ना कहानी को आगे बढ़ाता है।

प्रियदर्शन का निर्देशन हमेशा की तरह शानदार है। वह फिल्म में भावनाओं, रोमांच और तनाव का एक बेहतरीन मिश्रण तैयार करते हैं। फिल्म की लंबाई थोड़ी ज़्यादा है, लेकिन कहानी की रफ्तार ऐसी है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। हर सीन दर्शकों को बांधे रखता है।

बैकग्राउंड म्यूजिक और संगीत: फिल्म के माहौल को और भी दमदार बनाते हैं

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी इसके माहौल को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर टकराव वाले सीन में संगीत तनाव को और बढ़ाता है और दर्शक को अगले पल के लिए तैयार करता है। यह संगीत कलाकारों के अभिनय पर हावी नहीं होता, बल्कि सीन के प्रभाव को बढ़ाता है। प्रीतम का संगीत भी कहानी के साथ जुड़ा हुआ महसूस होता है। 'मेरे हीरो है वो' भावनात्मक असर पैदा करता है, जबकि 'रंगियारा' यात्रा वाले हिस्सों में अच्छी तरह बैठता है। गाने फिल्म के माहौल को थोड़ा हल्का करने के साथ-साथ जुड़े रहते हैं।

बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के माहौल को और भी दमदार बनाता है। खासकर जब अक्षय और सैफ के बीच टकराव वाले सीन आते हैं, तो संगीत तनाव को और बढ़ा देता है। प्रीतम का संगीत भी कहानी के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। 'मेरे हीरो है वो' जैसा गाना दिल को छू जाता है, वहीं 'रंगियारा' जैसे गाने फिल्म के सफर को और भी यादगार बनाते हैं। गाने फिल्म के माहौल को हल्का करते हैं, लेकिन कहानी से जुड़े रहते हैं।

'ओप्पम' का हिंदी रूपांतरण: नई ऊर्जा और प्रस्तुति

'हैवान' प्रियदर्शन की मलयालम थ्रिलर 'ओप्पम' का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म से परिचित दर्शक इसकी कहानी से अनजान नहीं होंगे, लेकिन हिंदी रूपांतरण को अलग अंदाज़, प्रस्तुति और व्यावसायिक रंग देने की कोशिश की गई है। कलाकारों का अभिनय कहानी में नई ऊर्जा भरता है। वहीं मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस, जिसमें वह मूल फिल्म की अपनी मौजूदगी को दोहराते हैं, 'ओप्पम' देखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण है और दोनों फिल्मों के बीच एक खूबसूरत कड़ी बनाती है।

यह फिल्म मलयालम फिल्म 'ओप्पम' का हिंदी रीमेक है। हालांकि कहानी वही है, लेकिन हिंदी में इसे एक नए अंदाज़ और प्रस्तुति के साथ पेश किया गया है। कलाकारों के अभिनय ने इसमें नई जान फूंकी है। मोहनलाल का स्पेशल कैमियो, जो उन्होंने मूल फिल्म में भी किया था, 'ओप्पम' के दर्शकों के लिए एक खास तोहफा है और दोनों फिल्मों को जोड़ता है।

निष्कर्ष: एक दमदार थ्रिलर, जो हर किसी को देखनी चाहिए

'हैवान' की सबसे बड़ी खूबी इसके कलाकारों का अभिनय है। अक्षय कुमार बिना ज़्यादा शोर किए अपने किरदार में खौफ पैदा करते हैं, जबकि सैफ अली खान अपने संयम और बारीक अभिनय से तनाव पैदा करते हैं। दोनों का यह अलग अंदाज़ उनकी भिड़ंत को एक सामान्य नायक-विलेन की लड़ाई नहीं बनने देता। दर्शक लगातार दोनों की अगली चाल का इंतज़ार करता रहता है और यहीं फिल्म अपनी सबसे मजबूत पकड़ बनाती है।

कुल मिलाकर 'हैवान' अपने ज़रूरी हिस्सों को सही तरीके से जोड़ने में सफल रहती है। अक्षय कुमार का किरदार परशुराम खौफ पैदा करता है, सैफ अली खान का श्याम कहानी को इंसानी भावनाओं से जोड़ता है और पहल चौधरी एक शानदार अंदाज़ में सामने आती हैं। सहायक कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं, जबकि प्रियदर्शन रोमांच और भावनाओं का संतुलन बनाए रखते हैं। 'हैवान' एक ऐसी थ्रिलर है, जिसमें उसके सबसे ज़रूरी हिस्से सही जगह पर काम करते हैं। अक्षय कुमार को अपने करियर का एक बेहद दमदार नकारात्मक किरदार मिला है, सैफ अली खान ने चुनौतीपूर्ण भूमिका को गहराई और संयम के साथ निभाया है और पहल चौधरी ने अपनी मौजूदगी से चौंकाया है। लेकिन फिल्म की असली जान अक्षय और सैफ की भिड़ंत है। प्रियदर्शन का निर्देशन इस टकराव के तनाव को बनाए रखता है और रोमांच, भावना, ड्रामा और बड़े पर्दे के मनोरंजन को एक साथ लेकर चलता है। कहानी भले ही पहले से जानी-पहचानी ज़मीन पर खड़ी हो, लेकिन कलाकारों का अभिनय, फिल्म का माहौल और इसका प्रस्तुतीकरण इसे एक अच्छा सिनेमाई अनुभव बना देता है।

यह फिल्म एक ऐसी थ्रिलर है जो अपने हर पहलू में सफल है। अक्षय कुमार का खलनायक का किरदार, सैफ अली खान का संजीदा अभिनय और पहल चौधरी का ताज़ा चेहरा, सब कुछ मिलकर फिल्म को खास बनाते हैं। अक्षय और सैफ के बीच की टक्कर ही फिल्म की असली जान है। प्रियदर्शन का निर्देशन इस टकराव को और भी रोमांचक बना देता है। भले ही कहानी थोड़ी जानी-पहचानी लगे, लेकिन कलाकारों के अभिनय, फिल्म के माहौल और प्रस्तुति ने इसे एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव बना दिया है। यह फिल्म हर उस दर्शक को देखनी चाहिए जो दमदार अभिनय और रोमांचक कहानी का आनंद लेना चाहता है।

रेकमेंडेड खबरें