शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 707 अंक नीचे, निफ्टी 238 अंक गिरा

NewsPoint
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मुंबई, 11 सितंबर: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट देखी गई। सुबह 9:16 बजे तक सेंसेक्स 707 अंक यानी 0.95% गिरकर 74,192 पर और निफ्टी 238 अंक यानी 1% गिरकर 23,238 पर कारोबार कर रहा था। मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा। निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी 2% से ज्यादा गिरे। ज्यादातर दूसरे सेक्टर्स जैसे मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, कमोडिटीज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, डिफेंस, सर्विसेज, इन्फ्रा, फार्मा और हेल्थकेयर भी लाल निशान में थे। सिर्फ निफ्टी आईटी ही हरे निशान में था। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.40% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.33% नीचे थे।

सेंसेक्स में टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, आईटीसी, भारती एयरटेल, टीसीएस और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयर चढ़े। वहीं, बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, इटरनल, सन फार्मा, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी जैसे शेयर गिरे।
दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी गिरावट का माहौल था। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के बाजार लाल निशान में थे। गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स 0.60% और नैस्डैक 0.65% नीचे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव शेयर बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। अगर कच्चे तेल की यह ऊंची कीमत बनी रहती है या और बढ़ती है, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर इसका बुरा असर पड़ेगा।

एक और बड़ी चिंता अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। 10-साल की यील्ड, जो अभी 4.96% है, 5% के स्तर के करीब पहुंच रही है। कई लोग इसे ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए एक अहम मोड़ मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ग्लोबल शेयर बाजारों में गिरावट की संभावना है, लेकिन यह कब होगा, यह कहना मुश्किल है।

बाजार में यह गिरावट कई वजहों से आई है। सबसे पहले, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। इससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जब तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है और महंगाई भी बढ़ती है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है और कंपनियों के लिए भी लागत बढ़ जाती है।

दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना है। बॉन्ड यील्ड वह ब्याज दर है जो सरकार अपने कर्ज पर देती है। जब यह दर बढ़ती है, तो निवेशकों को बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद लगता है। ऐसे में वे शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा सकते हैं। इससे शेयर बाजार पर दबाव आता है। 10-साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5% के करीब पहुंचना एक संकेत है कि निवेशक अब ज्यादा सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि इन दोनों वजहों से ग्लोबल शेयर बाजारों में गिरावट आ सकती है। यह गिरावट कितनी गहरी होगी और कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है। लेकिन यह साफ है कि निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। इसका मतलब है कि इन सेक्टरों की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ज्यादा हुई। मेटल यानी धातु कंपनियां, जैसे टाटा स्टील, और रियल्टी यानी रियल एस्टेट कंपनियां, जैसे डीएलएफ, इन पर दबाव बढ़ा।

इसके विपरीत, आईटी सेक्टर यानी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी। इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयर चढ़े। यह दिखाता है कि कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन पर इन वैश्विक चिंताओं का असर कम पड़ रहा है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट आई। ये वे कंपनियां होती हैं जो बड़े नामों की तुलना में छोटी होती हैं। अक्सर ये ज्यादा अस्थिर होती हैं, यानी इनमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। जब बाजार में गिरावट आती है, तो ये शेयर ज्यादा गिर सकते हैं।

कुल मिलाकर, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने गिरावट के साथ शुरुआत की, जो वैश्विक चिंताओं और बढ़ती महंगाई के डर को दर्शाता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सावधानी बरतें और सोच-समझकर निवेश करें।

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