महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की भस्म आरती: श्रद्धालुओं की भारी भीड़
महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की भस्म आरती: श्रद्धालुओं की भारी भीड़
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उज्जैन, 15 सितंबर (आईएएनएस)। मंगलवार को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि पर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती हुई। इस खास मौके पर हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में मौजूद रहे। तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के बाद जब श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।
मंगलवार की सुबह, बाबा महाकाल के मंदिर में एक बेहद खास और अलौकिक नज़ारा देखने को मिला। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि के शुभ अवसर पर, बाबा महाकाल की प्रसिद्ध भस्म आरती की गई। इस आरती को देखने के लिए मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। भस्म आरती से पहले, तड़के भगवान वीरभद्र से आज्ञा ली गई। इसके बाद, ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के मंदिर के द्वार खोले गए।बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया और फिर भस्म आरती शुरू हुई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के नारों से गूंज उठा। मंदिर में घंटियों की आवाज़, शंखनाद और मंत्रोच्चार का माहौल था।
मंदिर के पट खुलते ही, मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से उनका अभिषेक हुआ। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान, सबसे पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल चढ़ाया गया। कपूर आरती के बाद, बाबा ने अपना मुकुट धारण किया।
इसके बाद, झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक, त्रिनेत्र और त्रिपुंड लगाकर राजा के स्वरूप में सजाया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।
भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। अपने प्यारे भगवान के दर्शन पाने के लिए कई श्रद्धालु बीती रात से ही कतारों में लगे हुए थे। भस्म आरती के दौरान, पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना ज़रूरी होता है।
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद, बाबा महाकाल निराकार (बिना रूप वाले) से साकार (रूप वाले) रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बहुत सारे श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी आते हैं।